या हुसैन की सदाएं गूंजी
जुलूस में शामिल हजारों अजादारों ने काले कपड़े पहनकर मातम किया। या हुसैन की सदाएं गूंजी। जुलूस में तरह-तरह की झांकियां बनाई गई, जिनमें मक्का और मदीना की झांकियां विशेष रूप से आकर्षक थीं। जुलूस को देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना शिया मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। यह महीना इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कर्बला में शहादत की याद में मनाया जाता है। जुलूस के दौरान अजादारों ने जगह-जगह रुककर मातम किया। सीना जनी और नौहा पढ़कर इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला में शहादत को याद किया गया।