जैव विविधता के मामले में लखीमपुर खीरी प्रदेश का सबसे मालामाल जिला है। हाल ही में उत्तर प्रदेश जैव विविधता बोर्ड के निर्देश पर प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक गांव का चयन कर जैव विविधता का अभिलेखीकरण किया गया है।
जिले में नमूने के तौर पर फूलबेहड़ ब्लाक के नरहर गांव को लिया गया था। यहां 295 प्रजातियों की वनस्पतियां और 218 प्रजातियों के जीव सूचीबद्ध किए गए हैं। वनस्पतियों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली कई बहुमूल्य औषधीय वनस्पतियां भी शामिल हैं।
नरहर गांव का जैव विविधता रजिस्टर डीएफओ नीरज कुमार के निर्देशन में डिप्टी रेंजर अशोक कश्यप ने विषय विशेषज्ञों डॉ. वीपी सिंह, वैद्य राधेश्याम अवस्थी, पुष्पेंद्र वर्मा, विक्रम तिवारी, कैलाश यादव और ज्ञानेश पाठक के अलावा ग्राम प्रधान मनोहर लाल के सहयोग से तैयार किया है। 610 पृष्ठ के इस रजिस्टर में सभी जीवों और वनस्पतियों का चित्र सहित विवरण, उपलब्धता और उनके उपयोग के बारे में जानकारी दी गई है।
डीएफओ साउथ खीरी नीरज कुमार ने बताया कि अभिलेखीकरण का मकसद विश्व स्तर पर
यहां की जैव विविधता को प्रतिनिधित्व दिलाना है। लखीमपुर खीरी जिला जैव
विविधता में प्रदेश में सबसे समृद्ध है। भविष्य में यदि कोई कंपनी या
व्यक्ति यहां की वानस्पतिक संपदा का दोहन करना चाहेगी तो उसे ग्राम पंचायत
को रॉयल्टी देनी होगी।
वानस्पतिक संपदा एक नजर में
कृषि फसलें 45 प्रजातियां
फलदार, इमारती लकड़ी के वृक्ष 36 प्रजातियां
चारा प्रजातियां 5 प्रजातियां
खर पतवार 29 प्रजातियां
औषधीय पौधे 75 प्रजातियां
शोभाकार पौधे 20 प्रजातियां
जंगली वृक्ष, झाड़ियां, लताएं आदि 60 प्रजातियां
जलीय वनस्पतियां 15 प्रजातियां
कृषि फसलों के जंगली वनस्पतियों के संबंधी 8 प्रजातियां
धुआं तथा चबाने वाले पौधे 2 प्रजातियां
कुल 295
------जैव संपदा-------
पक्षी 103 प्रजातियां
स्तनधारी, सरीसृप और कीड़े 36 प्रजातियां
फसलों के नाशी जीव 19 प्रजातियां
पालतू पशु 6 प्रजातियां
मत्स्य (मछली) 54 प्रजातियां
कुल 218