लखीमपुर खीरी। परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक और दो की किताबों में बदलाव होने के बाद नई किताबें नहीं पहुंची हैं। जून तक किताबें पहुंचने का दावा किया जा रहा था, लेकिन अब जिम्मेदार कह रहे हैं कि जुलाई तक आपूर्ति होना भी मुश्किल है। इससे कक्षा एक और दो के करीब बीस हजार से ज्यादा बच्चों को पुरानी किताबों से पढ़ना पढ़ेगा।
छोटे बच्चों की पढ़ाई के लिए एनसीईआरटी की किताबों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। किताबों को इस तरह से तैयार किया जा रहा है, जिससे बच्चों को विषय समझने में आसानी हो। नवीन सत्र से पुरानी किताब कलरव पुस्तक की विदाई हो चुकी है। इसके स्थान पर सारंगी, आनंदमय गणित और मृदंगम नाम की किताबें आ चुकी हैं।
अभी तक विभाग को दोनों कक्षाओं की पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। जुलाई में परिषदीय स्कूल दोबारा खुलेंगे, लेकिन कक्षा एक और दो के बच्चों के पास नई पुस्तकें पढ़ने के लिए नहीं होंगी। प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को दूसरे छात्रों की किताबें या तो मांग कर पढ़नी होगी या फिर बिना किताबोंं के स्कूल आना होगा। दरअसल, परिषदीय स्कूलों में इस बार कक्षा एक और दो से संस्कृत विषय हो हटा दिया है। संस्कृत विषय की पढ़ाई अब कक्षा तीन से शुरू होगी।
एक ही किताब में चार विषय होते थे शामिल
परिषदीय स्कूलों के पंजीकृत छात्र-छात्राओं के लिए कक्षा से तीन तक जिन किताबों का वितरण किया जाता था, उसमें एक ही किताब में चार विषय शामिल होते थे। पुस्तक में हिंदी, अंग्रेजी, गणित और संस्कृत विषय शामिल रहता था। अब तीन विषय होंगे, जबकि एक और दो कक्षा में संस्कृत विषय शामिल नहीं किया है।
तीन से आठ तक की किताबों को आपूर्ति पूरी
कक्षा तीन से लेकर आठ तक की कक्षाओं के लिए विभाग ने अप्रैल महीने से पहले ही 44 लाख किताबों की डिमांड भेज दी थी, जो मिल चुकी हैं। लेकिन, कक्षा एक और दो की किताबें बच्चों को कब तक मिलेंगी, इस पर कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।