लखीमपुर खीरी। मेडिकल कॉलेज के अधीन जिला अस्पताल में कहने के लिए तो गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन यूनिट और स्टाफ की कमी से वेंटिलेटर का उपयोग नहीं हो पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग 31 में से 15 वेंटिलेटर के उपयोग का दावा कर रहा है। बावजूद इसके गंभीर मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ जाना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में 31 वेंटिलेटर हैं। इसमें 21 मेडिकल कॉलेज, जबकि 10 वेंटिलेटर जिला अस्पताल के हैं। हालांकि जिला अस्पताल में इनकी यूनिट व स्टाफ की कमी की वजह से यह बंद पड़े हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन इसमें 15 वेंटिलेटर के उपयोग का दावा तो कर रहा है, लेकिन 16 वेंटिलेटर अब भी निष्प्रयोज्य पड़े हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, यहां इमरजेंसी में प्रतिदिन करीब 80-100 मरीजों की ओपीडी रहती है, जबकि जनरल ओपीडी भी करीब 1500 के करीब रहती है। इसमें 10 प्रतिशत मरीज गंभीर रोग के आते हैं, जिन्हें लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। इससे खासकर हार्ट फेल, किडनी फेल, फेफड़ा की समस्या से जूझ रहे मरीजों को आईसीयू की जरूरत होती है। सुविधाओं की कमी होने की वजह से यहां आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
यूनिट न होने से कुछ दिक्कत है। स्टाफ की भी कमी है। जल्द ही मेडिकल कॉलेज शुरू होने जा रहा है। इसके बाद मरीजों को सभी सुविधाएं मिलने लगेंगी। - डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
बरसात बढ़ा रही पेट की बीमारियां
लखीमपुर खीरी। बरसात की रिमझिम भले ही गर्मी से राहत पहुंचा रही हो, लेकिन मौसम के बदलने से पेट के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। माना जा रहा है कि गंदा पानी, खुले में खाना और नमी भरे मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इलाज के लिए ऐसे मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल में इन दिनों करीब 1300 से 1500 के करीब ओपीडी हो रही है। इसमें पेट की समस्या को लेकर भी मरीज पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि बारिश में उमस भरी गर्मी की वजह से हाजमा बिगड़ जाता है। अत्यधिक मसालेदार सब्जी, फास्ट फूड, चिकनाई युक्त भोजन खाने की वजह से पेट की समस्या उत्पन्न होती है। इसलिए खान-पान का ध्यान रखें। परेशानी होने पर कुशल चिकित्सक से परामर्श लें। संवाद