जिले में डेढ़ लाख से अधिक कुपोषित 51 हजार से अधिक अति कुपोषित बच्चे हैं। यह खुलासा पिछले दिनों 0 से 5 वर्ष की उम्र के पांच लाख से अधिक बच्चों की वजन रिपोर्ट से हुआ है। इससे कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में भी कई गुना इजाफा हुआ है।
बता दें कि बाल विकास पुष्टाहार विभाग के 3503 आंगनबाड़ी केंद्रों की दिसंबर 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक जिले अति कुपोषित बच्चों की संख्या 3428 थी, जो कि जून 2015 में यह संख्या बढ़कर 7500 के करीब पहुंच थी। पिछले दिनों शासन के निर्देश पर दो चरणों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर किए गए बच्चों के वजन में अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की संख्या में कई गुना इजाफा हो गया है। वहीं बाल विकास पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों और वजन दिवस के आंकड़ों में भारी अंतर निकल कर सामने आया है। जिससे साफ है कि कुपोषण को लेकर प्रशासन द्वारा बरती जा रही सावधानियां सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। सही मायने में कुपोषण को मिटाने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को बांटा जाने वाला पोषाहार बाजारों में पहुंच रहा है। जिसका सीधा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेंद्र दुबे का कहना है कि कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को पोषाहार नियमित रूप से और बढ़ाकर दिया जाएगा। प्रयास है कि ऐसे बच्चों को जल्द सामान्य की श्रेणी में लाया जा सके।
कुपोषित, अति कुपोषित बच्चों की संख्या
ब्लाक वजन किए गए बच्चे कुपोषण अति कुपोषित
पलिया 28720 9083 3067
रमियाबेहड़ 27135 8567 3173
मितौली 35103 11412 3858
बांकेगंज 35570 11262 3633
फूलबेहड़ 32677 10010 3458
मोहम्मदी 28872 9136 3142
ईसानगर 32308 9558 3499
शहर 16159 4708 2087
निघासन 49033 14725 4255
धौरहरा 33884 10805 3363
पसगवां 29938 8950 3030
कुंभी/गोला 20850 6136 2014
बेहजम 31667 9466 3159
लखीमपुर देहात 45540 14087 4414
बिजुआ 29515 9240 3005
नकहा 23711 7783 2417
सौ फीसदी बच्चों का वजन
गांवों में सभी बच्चों का वजन किया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी के यहां बनी रिपोर्ट में बच्चों के सौ फीसदी वजन का जिक्र किया गया है। इसमें सामान्य बच्चों की संख्या भी दर्ज है, जो कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या सामान्य बच्चों के मुकाबले लगभग बराबर ही हैं।