लखीमपुर खीरी। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए लगाए गए राजकीय नलकूपों की मरम्मत और रखरखाव पर हर साल 3.96 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन जिले के अधिकांश नलकूप बदहाल हैं। कहीं मोटर खराब है तो कहीं भवन, नालियां और कुलाबे क्षतिग्रस्त हैं।
कई नलकूपों के आसपास झाड़ियां उगी हैं। पड़ताल में कहीं नलकूप वर्षों से बंद मिले तो कहीं पानी देने वाले नलकूपों की हौज और नालियां टूटी मिलीं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 826 सरकारी नलकूप हैं। इनमें सीतापुर में 198 और लखीमपुर डिविजन में 628 नलकूप हैं। तमाम योजनाओं के अलावा प्रत्येक नलकूप के रखरखाव और मरम्मत के लिए हर साल 48 हजार रुपये के हिसाब से 826 नलकूपों पर करीब 3.96 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 70 से अधिक नलकूपों की पड़ताल की गई। इनमें अधिकांश की स्थिति खराब मिली। शहर से सटे राजापुर गांव के नलकूप की नालियां काफी समय से क्षतिग्रस्त हैं। बांकेगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत सिसनौर के कुकुहापुर का नलकूप दो वर्षों से खराब है। प्रधान मुनीष वर्मा ने बताया कि कई बार शिकायत के बावजूद इसे ठीक नहीं किया जा सका। दो माह पहले मरम्मत के लिए टीम आई, लेकिन नलकूप चालू नहीं हो सका।
अमीरनगर के राजगढ़ में नलकूप संख्या 140 और 149 फेल हैं। बरवर के मुर्तजाअलीनगर में नलकूप संख्या एमडब्लू-56 आठ माह से खराब है। फरधान क्षेत्र के अधिकांश नलकूपों की नालियां टूट या बंद हो चुकी हैं। शंकरपुर के नलकूप की नाली पूरी तरह टूट चुकी है। मोहम्मदी के दुवाहा पश्चिम का नलकूप जर्जर है और कई साल से खराब पड़ा है।
मगरेना गांव का नलकूप भी खराब है। भीखमपुर का नलकूप संचालित है, लेकिन उसका मुख्य हौज और नाली टूटी है। नलकूप तक जाने का रास्ता भी नहीं है। सिंकदराबाद क्षेत्र के रहमतपुर निवासी इस्लाम ने बताया कि उनके क्षेत्र में कई नलकूप हैं, जिनमें दो पूरी तरह खराब हैं। शेष की स्थिति भी ठीक नहीं है। औरंगाबाद का एक नलकूप फेल है, जबकि पास के खुटी खुर्द का नलकूप चालू है, लेकिन बदहाल है।
अलीगंज के रोशन नगर कुसमौरी, बघौड़ा और गोपालापुर के नलकूपों के कुलाबे, नालियां और हौज क्षतिग्रस्त हैं। बेला परसुआ और राजकीय कृषि बीज प्रक्षेत्र स्टेट फार्म के नलकूपों की स्थिति भी ठीक नहीं है।
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कोठरी नहीं, पेड़ पर टंगे बिजली उपकरण
बेहजम। ग्राम पंचायत बहादुरपुर में दो नलकूप हैं। इनमें एक खराब है। दूसरा नलकूप संख्या 39 पानी देता है, लेकिन उसके पास न कोठरी है और न हौज। बिजली उपकरण पेड़ों पर लटके हैं और तार फैले हुए हैं। सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने से हादसे का खतरा बना हुआ है। इससे जानवरों और लोगों को भी खतरा है। जेई अवनीश अवस्थी ने बताया कि सुधारात्मक कार्य कराया जाएगा। संवाद
नलकूप के अधिशासी अभियंता से पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी। प्रति नलकूप 48 हजार रुपये खर्च होने के बाद भी यह स्थिति क्यों है, इसकी जांच कराई जाएगी। लापरवाही पर कार्रवाई भी की जाएगी।
-अभिषेक कुमार, सीडीओ
बेहजम के बहादुरपुर में कोठरी न होने से इस हाल में बिजली उपकरण। संवाद
बेहजम के बहादुरपुर में कोठरी न होने से इस हाल में बिजली उपकरण। संवाद
बेहजम के बहादुरपुर में कोठरी न होने से इस हाल में बिजली उपकरण। संवाद
बेहजम के बहादुरपुर में कोठरी न होने से इस हाल में बिजली उपकरण। संवाद