लखीमपुर खीरी। मनरेगा में वित्तीय संकट से जिले में विकास की गाड़ी हांफ रही है। बजट के अभाव में निर्माण कार्य ठप हैं। कर्मचारियों को पांच महीनों से वेतन नहीं मिला है। इससे उनका परिवार संकट झेल रहा है।
समय पर मजदूरी न मिलने पर श्रमिकों ने भी मनरेगा से किनारा करना शुरू कर दिया है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो 12 जून, 2025 को काम करने वाले मजदूरों की संख्या 54,774 थी, जो मौजूदा समय में 28075 बची है। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवंबर तक मनरेगा मजदूरों का 102.63 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
केंद्र सरकार से बजट नहीं मिलने से जिले में मनरेगा की स्थिति बहुत ही खराब होती जा रही है। बकाया भुगतान न मिलने से पूर्तिकारों ने माल देना बंद कर दिया है। वहीं, जनपद में मनरेगा के तहत तैनात 850 कर्मचारियों को पांच माह से वेतन नहीं मिला है। उनके घर का राशन खत्म हो चुका है। बच्चों की फीस जमा नहीं हो पा रही। कर्मचारियों पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। मनरेगा में एपीओ, कंप्यूटर ऑपरेटर, लेखा सहायक, तकनीकी सहायक, रोजगार सेवक आदि काम करते हैं। संवाद
निर्माण सामग्री के 95.19 करोड़ रुपये बकाया
वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्माण सामग्री का 76.44 करोड़ रुपये का बकाया अटका था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 18.75 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया और हो गया। पिछले साल का बजट तो अब तक नहीं मिला। यह कब मिलेगा, कुछ भी पता नहीं है।
-
आंगनबाड़ी केंद्रों व अन्नपूर्णा भवनों के काम अटके
बजट के अभाव में जिले में 253 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण कार्य अटक गए हैं। रमियाबेहड़ में पांच, बांकेगंज में आठ, मोहम्मदी में 24, बेहजम में 17, मितौली में 16, धौरहरा में 13, पसगवां में 10, पलिया में 25, निघासन में 37, ईसानगर में 13, लखीमपुर ग्रामीण में 14, कुंभी गोला में 13, फूलबेहड़ में 24, बिजुआ में 21 और नकहा में 13 केंद्रों के निर्माण होने हैं। वहीं, जिले में 75 अन्नपूर्णा भवन बनने हैं, लेकिन बजट न होने से कार्य ठप पड़े हैं। पशुशाला, इंटरलॉकिंग, टिन शेड आदि निर्माण भी नहीं हो पा रहे हैं।
लगातार बजट की मांग की जा रही है। हालांकि, श्रमिकों को वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवंबर तक 102.63 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है। अन्य मद का बजट आने वाला है। जैसे ही बजट मिलेगा, वैसे ही भुगतान कर दिया जाएगा।
-अमित कुमार परिहार, उपायुक्त मनरेगा