स्टाक एक्सचेंज के सेंसेक्स के नंबरों को देखकर शुरू हुआ सट्टेबाजी का खेल शहर में मकड़ी की जाल की तरह फैलता जा रहा है। शहर में इसकी शुरुआत कारोबार करने वाले लोगों से हुई। इसके बाद यह कुछ इस तरह फैला कि इसके चक्रव्यूह में मध्यम वर्ग बुरी तरह फंसता चला गया। कई गुना नकदी रकम मिलने की उम्मीद में न सिर्फ युवा बल्कि मध्यम वर्ग सटोरियों के जाल में फंसता जा रहा है। गली-मोहल्लों में हो रहे सट्टे के इस खेल पर पुलिस का अंकुश नहीं है या यूं कहें कि सटोरियों से मिलीभगत के कारण पुलिस इस गोरखधंधे को नजरंदाज किए हुए हैं। सूत्रों की माने तो इनदिनों शहर के कोनेे-कोने में सट्टे का गोरखधंधा तेजी से फल-फूल रहा है। आलम यह है कि मुख्य चौराहों पर सटोरियों के एजेंट अड्डा बनाए हुए हैं। खासकर संकटा देवी, गोटैयाबाग, हीरालाल धर्मशाला चौराहा, थरवरनगंज, नौरंगाबाद, मेला मैदान, गढ़ी रोड, रानीगंज बाजार जैसे मोहल्लों में सटोरियों का जाल पूरी तरह फैला चुका है। सटोरिए लोगों को 10 रुपये लगाओ 400 रुपये पाओ का लालच देकर सेंसेक्स के इकाई या दहाई नंबर पर सट्टा लगवाते हैं। इस गोरखधंधे से जुड़े एक सूत्र का कहना है कि सट्टेबाजी के धंधे से हर वर्ग जुड़ रहा है। आम आदमी से लेकर महिलाएं, छात्र, मजदूर, दुकानदार सभी सट्टेबाजी के खेल में हाथ आजमा रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इस गोरखधंधे, सटोरियों की गतिविधियों और इनके अड्डों के बारे में संबंधित थाने या चौकी की पुलिस को सबकुछ पता होता है, लेकिन पुलिस भी जानबूझ कर इसे नजरंदाज किए हुए है।
सब कुछ गंवाकर फंस जाते हैं सूदखोरों के चंगुल में
शहर में कई ऐसे प्रकरण सामने आए हैं, जिसमें सट्टेबाजी में सब कुछ गंवाने के बाद लोग सूदखोरों के चंगुल में लोग फंस रहे हैं। अभी हाल में ही अयोध्यापुरी स्थित कांशीराम कॉलोनी में रहने वाला एक युवक सट्टेबाजी के मकड़जाल कुछ ऐसा में फंसा कि आखिर में उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसी तरह कर्ज में डूबे बहादुरनगर निवासी सर्राफ कृष्ण कुमार सोनी ने भी नुकसान की भरपाई के लिए सट्टेबाजी में हाथ आजमाया, लेकिन इसमें सफलता न मिलने पर आखिर कृष्ण कुमार सोनी ने पूरे परिवार के साथ जहरीला पदार्थ खाकर सामूहिक आत्महत्या कर ली। इसी तरह शहर में बसे हरदोई के एक सर्राफ और उसके पुत्र से डेढ़ लाख की नकदी लूटने के बाद गोली मार दी थी। जिससे पुत्र की मौत हो गई। इस घटना में भी ब्याज और सूदखोरी का मामला सामने आया था। पूर्व में हत्या की कई घटनाओं में भी सट्टेबाजी और सूदखोरी का जिक्र होता रहा है लेकिन आम तौर पर सट्टेबाजी और सूदखोरी को गोपनीय ही रखा जाता है। बाजार में छोटे कारोबारी अक्सर नुकसान की भरपाई के लिए सट्टेबाजी का सहारा लेते हैं। इसके लिए वह सटोरियों से भी उधार लेने से गुरेज नहीं करते हैं। यही उधारी कभी-कभी उन पर भारी भी पड़ने लगती है।
पांच माह से नहीं दर्ज हुआ कोई मुकदमा
सटोरियों के खिलाफ पुलिस ने शुरू में अभियान चलाया जगह-जगह छापेमारी कर सटोरियों को पकड़ा और उन पर मुकदमे भी दर्ज हुए, लेकिन सटोरियों पर कभी जुआ अधिनियम के अलावा किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। लिहाजा सटोरिया पकड़ कर थाने ले जाया गया तो उसे मुचलके पर वहीं से रिहा कर दिया गया। जिससे सटोरियों के हौसले बुलंद होते गए और पुलिस ने सटोरियों पर कार्रवाई करना बंद कर दिया। पिछले पांच माह में सदर कोतवाली में एक भी सटोरिये के खिलाफ जुआ अधिनियम में भी कार्रवाई नहीं की गई।