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बिना पट्टों को हो रहा खनन

Thu, 18 Jun 2015 07:14 PM IST
लखीमपुर खीरी
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जिले में खनन का पट्टा बीते कई सालों से नहीं किया गया, लेकिन नहरों, नदियों और खेतों से खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है। अब हाईकोर्ट ने प्रदेश में मई 2015 के बाद जारी सभी खनन पट्टों पर रोक लगा दी है। हालांकि खीरी में पहले से ही कोई पट्टा नहीं है, फिर भी खनन जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि इन खनन करने वालों को कौन रोकेगा। खनन के गोरखधंधे को तलाशने के लिए अमर उजाला की टीम बृहस्पतिवार को निकली तो कुछ इस तरह से खनन होते मिला।
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जिला मुख्यालय से सटे गांवों में खनन
जिला मुख्यालय और शहर से सटे गांवों में भी खनन माफियाओं का गोरखधंधा कम नहीं है। शहर से सटे गांव रामापुर के पास एक खेत में कुछ इस तरह खनन होते मिला। इस कार्य में जेसीबी मशीनें, 10 टायरा डम्फर, ट्रैक्टर में जुती हाइड्रोलिक ट्रॉलियों को गोरखधंधे में प्रयोग किया जा रहा है। खनन का काम रात को किया जाता है। इसकी शिकायत भी हुई, लेकिन तहसील प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।
प्रभारी खनन/एडीएम एसपी सिंह ने बताया कि जिले में खनन का पट्टा पिछले कई सालों से नहीं किया गया है, इसलिए यदि कहीं भी खनन हो रहा है तो वह गलत है। कहीं से यदि कोई शिकायत मिलती है तो उसे पकड़ा जाएगा। खनन करते पकड़े जाने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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गोला के पास खेत को बना दिया तालाब
गोला गोकर्णनाथ। नगर से सटे बांकेगंज रोड पर खनन माफिया भोले-भाले किसानों की जमीन में पांच फिट गहराई तक मिट्टी निकालने की बात कहकर पूरे खेत को गहरा तालाब बना दिया। बांकेगंज रोड पर रेलवे क्रॉसिंग के पास जेसीबी मशीन से खनन कर भट्ठों पर मिट्टी की बिक्री की जा रही है, जिसे कभी भी पकड़ा जा सकता है।
नहर से निकाली जाती है बालू
रजागंज। तहसील गोला और लखीमपुर इलाके में स्थित शारदा नहर से बेखौफ होकर खनन माफिया बालू निकालते हैं। इसके बाद खुलेआम यह बालू निर्माण स्थलों और दुकानों पर ले जाकर बिक्री कर दी जाती है। जानकारों की मानें तो इस धंधे में सफेदपोश भी शामिल हैं। यहां कई बार अवैध खनन पकड़ा गया, लेकिन मामला रफादफा कर दिया गया।
यह हैं अड्डे
गोला गोकर्णनाथ। तहसील के समीप एक भट्ठे पर मोहम्मदी रोड, लखीमपुर रोड, मूड़ा सवारान के पास, कुकरा के पास भट्ठों पर पास-पड़ोस के जिलों से दो वर्ष पूर्व आए खनन माफियाओं ने डेरा जमा रखा है।
लगा रहे राजस्व को चूना
खनन माफिया बिना रॉयल्टी दिए कृषि योग्य उपजाऊ भूमि से मिट्टी निकालकर तालाब में तब्दील कर देते हैं, जिससे कृषि योग्य भूमि का रकबा आए दिन घट रहा है। वहीं इस गोरखधंधे में प्रयुक्त ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डम्फरों पर रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं अंकित होता है। ट्रैक्टरों को केवल कृषि कार्य के लिए पास कराकर किराये का धड़ल्ले से काम किया जा रहा है, इससे भी राजस्व की चोरी की जा रही है। इन वाहनों के चालक तेज गति से अपने वाहन चलाते हैं और रास्ते पर मिट्टी गिराते हुए चलते हैं। इन वाहनों से गिरने वाली मिट्टी से राहगीरों को धूल का सामना करना पड़ता है वहीं आए दिन दुर्घटनाओं का वह लोग शिकार भी हो रहे हैं।
पलिया में भी खनन जोरों पर
पलियाकलां। इलाके में बालू और मिट्टी का खनन जोरों पर होता है। इसमें माफिया पुलिस, वन विभाग, प्रशासन से साठगांठ कर नदियों आदि से बालू का खनन करते हैं तो वहीं मिट्टी खनन का काम खेत मालिकों को रकम देकर किया जाता है। खनन माफिया नगला, खैरहना, दौलतापुर, अतरिया, श्रीनगर आदि गांवों से लगे शारदा नदी से खनन करते हैं। इसके अलावा सुहेली नदी से भी खनन किया जाता है।
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