लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (आरएएम) ने बिहार में भरत तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मृत्यु के मामले को गंभीर बताते हुए राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा है। संगठन ने मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि भरत तिवारी को आत्मसमर्पण अथवा निहत्थी स्थिति में होने के बावजूद गोली मारी गई है, तो यह संविधान प्रदत्त जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। संगठन ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को प्रभावी दायित्वों से हटाया जाए तथा यदि फर्जी मुठभेड़ या अवैध बल प्रयोग सिद्ध हो तो हत्या समेत अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
ज्ञापन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की निगरानी में जांच कराने और मुठभेड़ से जुड़े वीडियो, पोस्टमार्टम व फोरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग रखी गई। ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष विनोद शुक्ला, अवधेश मिश्रा, राकेश बाजपेयी, देवेन्द्र कुमार शुक्ला, प्रमोद कुमार त्रिवेदी सहित अन्य लोग शामिल रहे।