दो दिन तक आसमान में उमड़ने-घुमड़ने के बाद बादल आखिर बुधवार की सुबह बरस गए। करीब दो घंटे तक रुक-रुक हुई झमाझम बारिश से सुबह तो मौसम खुशनुमा रहा लेकिन आसमान साफ होते ही इतनी कड़ी धूप निकली कि लोगों के पसीने छूट गए। पुरवा हवाओं के चलने से धूप के बावजूद गर्मी से राहत रही।
तराई में 15 जून से मौसम के तेवर ढीले हैं। 15 और 16 जून को आसमान में बादल छाए रहे। 17 जून की सुबह आधे जिले में तो झमाझम बारिश हुई लेकिन बाकी जगहों के लोग बारिश को तरसते रहे। मंगलवार को भी बादल छंटने के बाद कड़ी धूप निकली थी। आधी रात के बाद एक बार फिर बादल छाए तो धरती को तर कर गए। सुबह करीब चार बजे से बारिश शुरू हुई तो दो घंटे तक लगातार रुक-रुक कर बारिश होती रही। बारिश के बाद भले ही तापमान में गिरावट आई हो लेकिन कड़ी धूप से उमस भरी गर्मी बढ़ गई है।
बुधवार को अधिकतम तापमान 38.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। पानी बरसने के बाद करीब आठ बजे तक तो बादल छाए रहे लेकिन इसके बाद कड़ी धूप निकली। बारिश होने से शहर में कई जगह जलभराव भी नजर आया। चोक पड़ी नालियां उफना उठीं और नालियों का गंदा पानी सड़कों पर फैल गया जिससे लोगों को निकलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कलक्ट्रेट, जिला पंचायत, जिला अस्पताल, जिला सहकारी बैंक के आसपास के अलावा नई बस्ती की गलियों में भी जलभराव होने से लोगों को दिक्कतें हुईं।
आंधी में गिरे कई पेड़
पलियाकलां। क्षेत्र में मंगलवार की रात आई तेज आंधी में जहां कई पेड़ गिर गए वहीं लोगों के छप्पर और टिन भी उड़कर दूर जा गिरे। उधर स्थानीय सिनेमा चौराहे पर लगा विद्युत पोल तेज आंधी की चपेट में आकर टेढ़ा हो गया। यद्यपि आंधी के बाद हुई हल्की वर्षा से तापमान में गिरावट आई जिससे लोगों ने राहत महसूस की।
मंगलवार की रात शहर की कोतवाली कैंपस में लगे एक पेड़ की डाल जहां नीचे आ गिरी वहीं संपूर्णानगर रोड पर खड़ा एक सूखा पेड़ गिर गया। दुधवा से चंदनचौकी व गौरीफंटा मार्ग पर भी कई पेड़ गिरे गए। उधर कई लोगों के छप्पर और टिनें भी आंधी में उड़ गईं।
मझगईं। कई दिनों से उमड़ रहे बादल आखिरकार बुधवार सुबह तीन बजे तेज हवाओं के साथ बरस ही गए। आषाढ़ की पहली बरसात से जहां गर्मीं से कुछ सुकून मिला वहीं किसानों की खुशी का ठिकाना न रहा। बारिश होने से किसानों के गन्ने की फसल की सिंचाई भी हो गई। तेज हवाएं कई घरों के छप्पर और टिने भी उड़ा ले गईं। कस्बे में पानी निकास की व्यवस्था न होने के कारण कई दुकानों में बरसात का पानी भर गया। जिससे व्यापरियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।