लखीमपुर खीरी। तेजी से बदलते मौसम के बीच बुखार और दूसरे रोगों से पीड़ित लोगों के सामने संकट आ खड़ा हुआ है। इन रोगों की दवाएं जिला अस्पताल में मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन ने भेज तो दी हैं, मगर इनके बांटने पर रोक लगा दी है। कारण यह है कि इन दवाओं के करीब महीने भर पहले नमूने लिए गए थे, मगर उनकी रिपोर्ट नहीं आ सकी है। अब पुराने स्टाक में ऐसे रोगों की तीन-चार दिन की ही दवा बची है। स्थिति को देखते हुए सीएमएस लगातार मुख्यालय से संपर्क बनाए हुए हैं।
कॉरपोरेशन की ओर से जिला और महिला अस्पताल में करीब 20 दिन पहले दवाइयों का स्टाक आया था। इनमें बुखार, गैस, मलेरिया और दूसरे रोगों की दवाओं के साथ ही कई एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं। लेकिन इनका वितरण लखनऊ में लिए गए नमूने की रिपोर्ट आने के बाद ही किया जा सकेगा। वो भी रिपोर्ट सही आए तो। नमूना लिए 25 दिन तो बीत चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक कई बीमारियों की दवाओं का पुराना स्टॉक अब दो चार दिन का ही शेष रह गया है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया गया तो मरीजों को दवाओं के लिए बाजार का सहारा लेना पड़ सकता है।
... वापस भेजी जा सकती हैं दवाएं
लखनऊ में लिए गए नमूने की जांच में यदि दवा अधोमानक पाई गई तो इनको वापस किया जाएगा। इससे सरकार का खर्चा बढ़ जाएगा।
महिला अस्पताल की भी यही है स्थिति
महिला अस्पताल के जिम्मेदारों का कहना है कि कॉरपोरेशन को डिमांड भेजी गई थी। एक तो स्टॉक मिलने में लेटलतीफी होती है और दूसरे जो दवाएं आई भी हैं उनके वितरण पर रोक है, क्योंकि जब तक सैंपलिंग की रिपोर्ट के बाद कॉरपोरेशन की अनुमति नहीं मिल पाती तब वितरण नहीं हो सकता।
स्टोर में मौजूद प्रमुख दवाएं
फ्लूड- 1056 पेटी (एक पेटी में 25 बोतल)
सिप्रोफ्लोक्सेसाइन टेबलेट-50 पेटी
फेनीट्वाइ सोडियम टेबलेट- 40 पेटी
क्लोरोक्वीन फास्फेट टेबलेट-50 गत्ते
पैरासीटामॉल इंजेक्शन- 70 पेटी
प्रोमेथाजीन इंजेक्शन- 25 गत्ते
पेंटाजोसीन-60 गत्ते
इन बीमारियों के काम आती हैं नए स्टॉक में आईं दवाएं
रेनेटिडीन टेबलेट- गैस एवं एसीडिटी
सिप्रोफ्लाक्सासिन टेबलेट- एंटीबायोटिक
फेनीट्वाइ सोडियम टेबलेट- झटके आने पर
क्लोरोक्वीन फास्फेट टेबलेट- मलेरिया बुखार
पैरासीटामॉल इंजेक्षन- बुखार
पेंटाजोसीन- दर्द निवारक इंजेक्षन
प्रोमेथाजीन-एंटी एलर्जिक
दोनों अस्पतालों में करीब चार हजार मरीज रोज आ रहे
जिला व महिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब चार हजार मरीज आ रहे हैं ऐसे में भर्ती मरीजों के लिए भी दवाओं की नियमित डिमांड रहती है। बताया गया कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन दो हजार नए पर्चे और करीब 1000 पुराने पर्चों पर मरीज देखे जाते हैं। वहीं महिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 600 नए और पुराने 400 मरीज आते हैं। अस्पताल प्रशासन इन मरीजों को सरकारी दवाएं मुहैया कराने का दावा करता है। वहीं दोनो अस्पतालों में करीब 150 मरीज भर्ती भी रहते हैं।
कॉरपोरेशन से दवाओं का स्टॉक आ चुका है। मगर, अभी तक उनके वितरण की अनुमति नहीं मिली है। इसके लिए मुख्यालय के अधिकारियों को लिखा गया है। -डॉ. आरके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्प्ताल