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नेपाल सीमा पर बढ़ रहा नकली करंसी का धंधा

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लखीमपुर खीरी। भारत-नेपाल सीमा पर भारतीय नकली करंसी का धंधा कई सालों से चल रहा है। इस धंधे से जुड़े लोगों के तार नेपाल, नेपाल से लगने वाले उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अलावा उत्तराखंड से भी जुड़े हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार नकली करंसी के साथ कुछ लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन हर बार वह मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंच सकी।
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डेढ़ साल पहले थाना संपूर्णानगर के गांव बसही निवासी विनोद को इसी थाना क्षेत्र के गांव सेमरी में पुलिस ने नकली भारतीय पांच-पांच सौ रुपये के 26 नोटों के साथ पकड़ा था। जांच में यह बात साफ हुई थी कि इसी थाना क्षेत्र के गांव बमनगर निवासी सुरेश ने विनोद को नकली नोट बाजार में एक-एक कर चलाने के लिए दिए थे। इतना ही नहीं उत्तराखंड के गांव गोथा (सितारगंज) निवासी राजमंगल और ऊधम सिंह नगर निवासी संतोष का नाम भी सामने आया था। यह नोट नेपाल से लाए गए थे। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट तो दाखिल कर दी, लेकिन यह पता नहीं लगा सका कि नकली नोट नेपाल में किसने दिए थे। महीने भर पहले उत्तराखंड के ऊधमसिंहनगर में नेपाली करंसी बरामद की गई तो इससे पहले भी कई जिलों में नेपाल बॉर्डर पर कई बार लाखों की नकली करंसी पकड़ी गई, लेकिन अधिकतर मामलों में पुुलिस मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंच सकी।
नकली करंसी छापने वाले नहीं लगे हाथ
पांच दिन पहले चंदनचौकी पुलिस और एसएसबी ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चंदनचौकी निवासी मनोज कुमार को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसके पास से 500-500 रुपये के 300 नकली नोट बरामद किए थे। पुलिस की जांच में इस बात का खुलासा हुआ था कि इसी कोतवाली क्षेत्र के गांव मंगलपुरवा निवासी जितेंद्र कुमार वैब प्रिंटर्स से नकली नोटों की छपाई करता था। इस धंधे में गांव के ही राजेश, रतनलाल, वीरेश और वीरेंद्र के नाम सामने आए थे। पुलिस ने सभी छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी और गिरफ्तार किए गए मनोज कुमार को जेल भेज दिया था। खासबात यह है कि पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक मुख्य आरोपी जितेंद्र और उसके साथियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
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पुलिस की टीमें लगी हुई हैं। जल्द ही नकली करंसी मामले में शामिल लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
-पूनम, एसपी
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