लखीमपुर खीरी। राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए मुख्यालय से नौ किमी दूर देवकली रोड पर गांव सैदापुर भाऊ में 16 एकड़ सरकारी जमीन आवंटित होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने से पहले स्थान बदलवाने की रणनीति छह माह पहले ही बना ली गई थी। मई 2020 में शासन ने प्रस्तावित स्थल पर निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के लिए 20 करोड़ रुपये बतौर प्रथम किश्त अवमुक्त किए, जिसके बाद रणनीतिकारों में खलबली मच गई। इससे खीरी सांसद अजय मिश्र टेनी, सदर विधायक योगेश वर्मा और जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन नरेंद्र सिंह ने 26 मई 2020 को वित्त, संसदीय कार्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री सुरेश खन्ना से मिलकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग रखी, जिसके बाद मंत्री के निर्देश पर शासन के विशेष सचिव ने चार जून 2020 को डीएम लखीमपुर को पत्र लिखा। इसमें जनप्रतिनिधियों द्वारा सुझाई गई जमीन पर मेडिकल कॉलेज निर्माण के संबंध में आख्या तलब की थी। इसके बाद तो जैसे सारा गेम ही पलट गया, जिससे सैदापुर भाऊ समेत आसपास के दर्जनों गांवों के वाशिंदों की उम्मीदें धूमिल होती जा रही है।
केंद्र सहायतित योजना इस्टैबलिशमेंट ऑफ न्यू मेडिकल कॉलेजेज अटैच्ड विद एक्जिस्टिंग डिस्ट्रिक्ट/रेफरल हॉस्पिटल (फेज 3) के तहत जिला चिकित्सालय को उच्चीकृत कर राजकीय मेडिकल कॉलेज बनाया जाना है। मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए व्यय वित्त समिति की बैठक में अनुमोदित लागत 233.1377 करोड़ (दो अरब तैतीस करोड़ तेरह लाख सतहत्तर हजार) की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष 20 करोड़ धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है, जिससे मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य एमसीआई मानक एवं ले आउट प्लान के अनुरूप कराने का उत्तरदायित्व महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण लखनऊ को सौपा गया है। जबकि भवन निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के डिवीजन निर्माण खंड एक को मिली है। लॉकडाउन के बाद निर्माण शुरू कराने की तैयारी चल ही रही थी, कि विशेष सचिव का पत्र आने के बाद डीएम ने जनप्रतिनिधियों द्वारा सुझाए गए स्थान/जमीन की जांच के लिए समिति बनाई। जिसने भी जनप्रतिनिधियों द्वारा बताई गई जमीन को उपयुक्त बताते हुए ओके की रिपोर्ट भेज दी है। नेताओं, रसूखदार किसान और पूंजीपतियों के गठजोड़ से यह कार्रवाई गुपचुप तरीके से हुई, जिसकी जानकारी लोगों को बहुत देर हुई। हालांकि खीरी सांसद ने 27 फरवरी 2020 को ही मेडिकल कॉलेज का निर्माण प्रस्तावित स्थान सैदापुर भाऊ से हटाकर दुधवा स्टेट हाईवे पर स्थित गांव ताहिरपुर में कराने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था। इस पत्र में सांसद ने मुख्यमंत्री को बताया है कि मेडिकल कॉलेज के लिए गांव ताहिरपुर में उपयुक्त जमीन उपलब्ध होने का सुझाव जिला पंचायत अध्यक्ष और सदर विधायक योगेश वर्मा ने दिया है।
सिर्फ चार किसान करोड़ों कीमत की जमीन करेंगे दान!
शहर में रोडवेज डिपो का वर्कशॉप बनाने के लिए दशकों से पांच एकड़ जमीन की व्यवस्था जिला प्रशासन नहीं करा पाया है और न ही कभी जनप्रतिनिधि आगे आए। अब मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए जमीन और स्थान को बदलवाने के लिए इस कदर सियासत तेज हुई है कि ताहिरपुर में मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए 15 एकड़ कृषि भूमि दान करने के लिए चार रसूखदार किसानों जोगेंद्र सिंह, चरन सिंह, रघुवीर सिंह और चरनजीत कौर पत्नी मलकीत सिंह ने शपथ पत्र प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को दिया है।
मेडिकल कॉलेज बनते ही कई गुना बढ़ेंगे जमीन के रेट
मेडिकल कॉलेज के स्थान बदलने की कवायद के पीछे रियल एस्टेट कारोबारी भी सक्रिय हैैं। सूत्र बताते हैं कि ताहिरपुर में जिस जगह मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए सुझाव दिया गया है, उसके आसपास कई जनप्रतिनिधियों की सैकड़ों एकड़ जमीनें हैं। इन जमीनों को कीमती बनाने के लिए ही सारी कवायद कीन जा रही है। इससे पहले एआरटीओ कार्यालय शहर से सटे गांव पहाड़ापुर में बनाया गया है, जिसके आसपास की जमीनें कई जनप्रतिनिधियों ने खरीदी थीं। बाद में इन जमीनों को महंगे दामों पर फुटों में बेचा गया। अब मेडिकल कॉलेज के आसपास का इलाका विकसित होने के साथ ही जमीनों की कीमतें बढ़ना स्वाभाविक है।