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‘अर्थहीन शब्द है धर्म निरपेक्षता’

Wed, 15 Apr 2015 07:35 PM IST
लखीमपुर खीरी।
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धर्म अपरिवर्तनीय है कभी किसी के धर्म का परिर्वतन नहीं हो सकता। धर्म एक शाश्वत सत्य है। यह बात यहां ऋषि आश्रम में मूर्ति स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आए शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने कही।
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धर्मांतरण के मुद्दे पर जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि किसी का धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता, विडंबना यह है कि हमने पूजा पद्धति और कर्मकांड को ही धर्म मान लिया है। धर्म सार्वकालिक है धर्म के बिना मनुष्य जी नहीं सकता। वायु का धर्म सुष्कता, जल का शीतलता, अग्नि का दाहकता है। प्राणीमात्र का ही नहीं चर-अचर और वनस्पतियों तक का एक धर्म है। धर्मनिरपेक्षता एक अर्थहीन शब्द है। मनुष्य धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता। इस धर्मनिरपेक्ष शब्द को भारत के संविधान से हटाया जाना चाहिए। महात्मा गांधी भी कहा करते थे कि बिना धर्म के कोई जीवित नहीं रह सकता। शंकराचार्य ने कहा कि धर्म के अनेक विभाजन हैं। जैसे व्यक्ति का धर्म, समाज का धर्म, राष्ट्र का धर्म, व्यक्ति के रूप में पिता का धर्म, पुत्र का धर्म, प्रजा का धर्म, पति का धर्म, पत्नी का धर्म, इस तरह से धर्म एक बहुत व्यापक शब्द है। इसलिए धर्म के अस्तित्व को कोई मिटा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता के कारण ही समाज में भय, भूख, भ्रष्टाचार तथा आतंकवाद व्याप्त है। मनुष्य यदि स्वधर्म का पालन करे तो समाज में सभी प्रकार की विसंगतियां दूर हो जाएंगी। विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान धर्म के पालन में हैं। धार्मिक व्यक्ति कभी अपराध नहीं कर सकता। इतिहास इस बात का साक्षी है कि विदेशी शासकों ने हमारे यहां के मठ मंदिरों और उपासना पद्धति को विकृत करने का प्रयास किया लेकिन आज भी सनातन धर्म सुरक्षित है। प्रेसवार्ता के समय व्यवसाई प्रेम शंकर अग्रवाल सहित तमाम लोग उपस्थित थे।
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