होली के मौके पर बाजार बृहस्पतिवार को भी खूब चहका। कपड़े, जूते-चप्पल, चूड़ियों से लेकर पकवान और पकवान बनाने के सामान की जबरदस्त खरीदारी हुई। रंग, गुलाल और पिचकारियों की दुकानों पर बच्चों और युवाओं का जमावड़ा दिखा। चेहरे को ढकने के लिए मुखौटे तो बालों को ढकने के लिए तरह-तरह की टोपियों की खूब बिक्री हुई। मिठाइयां, गुझिया, नमकीन, कचरी पापड़, ड्राई फ्रूट्स की दुकानें मुख्य सड़कों के किनारे ही नहीं गली-मोहल्लों में भी सजी नजर आईं। रंग गुलाल और पिचकारियों से पूरा बाजार ही होली के रंगों में रंगा नजर आ रहा है। बाजार में शाम चार बजे से व्यापारियों ने रंग खेलना शुरू कर दिया जो देर रात तक जारी रहा।
पलियाकलां। रंगों की दुकान पर काफी भीड़ रही। पिछले साल की तुलना में इस बार गुलाल दस से बीस रुपये महंगा बिक रहा है, जबकि पिचकारियों के रेट भी आसमान छू रहे हैं। गुलाल इस बार पचास से साठ रुपये किलो तो पिचकारियों के रेट बीस रुपये से 150 रुपये तक पहुंच गए हैं।
मैलानी। होली से पहले यहां बाजार में खूब चहल-पहल रही। सुबह से ही बाजार में ग्राहकों का आना-जाना शुरू हो गया। लोगों ने रंग, गुलाल, पिचकारी, रेडीमेड, फुटवियर, कॉस्मेटिक, चूड़ियों, किराना, चिप्स, पापड़ आदि की खूब खरीदारी की। देर रात तक खरीदारी का सिलसिला चलता रहा।
रेडीमेड कपड़ों की दुकानों पर रही जबरदस्त भीड़
तराई के जिलों में होली पर नए कपड़े पहनने की परंपरा के चलते बृहस्पतिवार को शॉपिंग मॉल और रेडीमेड कपड़ों केे शो रूम्स पर काफी भीड़ रही। जो लोग अब तक कपड़े नहीं खरीद पाए थे, उन्होंने आज खरीदारी की। युवाओं ने गर्मी के सीजन के लिए जींस टीशर्ट आदि खरीदे और लड़कियों ने अपनी पसंद के कॉटन के कपड़े। युवाओं में वैसे भी रेडीमेड गारमेंट्स का क्रेज है, लेकिन पहले से कपड़े न सिला पाने वाले बड़े बुजुर्गों ने भी रेडीमेड पैंट शर्ट आदि खरीद कर काम चलाया। चूड़ी की दुकानों पर आज भी खासी भीड़ देखी गई।
टेंशन नहीं लेने का, बाजार से खरीद लाए पकवान
जीवन की व्यस्तता और पकवान बनाने के लिए सामान इकट्ठा करने के झंझट से बचने को अब लोग बाजार से गुझिया, नमकीन, इलाहाबादी समोसा, कचरी, पापड़ और होली में इस्तेमाल होने वाले पकवान घर में बनाने की अपेक्षा बाजार से खरीदने को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। यह सामग्री घर में बनाने में लगने वाली कीमत के बराबर ही बाजार में उपलब्ध हो जाते हैं। इसके चलते अब बहुत कम लोग घरों पर पकवान बनाने का झंझट पालते हैं। इसके चलते बाजार में होली के पकवान बेचने वाली दुकानों पर दिन भर खासी भीड़ जमा रही।
राजस्थानी और गुजराती पगड़ी की रही धूम
सिर और बालों को रंग से बचाने के लिए होली में लोग तरह, तरह के कैप, टोपी और पगड़ी का इस्तेमाल करते हैं। बाजार में बालों वाली विब टाइप की कैप, हैट, रंग बिरंगी और स्टाइलिश टोपियां बाजार में बिक रही हैं। पिछले तीन चार वर्षों से पगड़ी का क्रेज बढ़ा है। बाजार में राजस्थानी और गुजराती टोपियां खूब बिक रही हैं। एक दुकानदार ने बताया कि इस बार गुजराती टोपियों की रिकार्ड बिक्री हुई है। बच्चों ने तो तरह-तरह की टोपियां खरीदीं, लेकिन युवाओं ने पगड़ी पसंद की।
ब्रांडेड और हर्बल रंगों की बाजार में खास डिमांड
इस बार बाजार में सामान्य रंग और गुलाल की जगह लोग ब्रांडेड और हर्बल रंग-गुलाल को तरजीह दे रहे हैं। केमिकल युक्त हानिकारक रंगों से होने वाले नुकसान को लेकर लोग जागरूक हुए हैं, जिसके चलते इस बार ब्रांडेड रंग और गुलाल की मांग बढ़ी है। रंग की अपेक्षा लोग रंग-बिरंगे गुलाल खरीद रहे हैं। इससे इस बार साफ सुथरी और स्वस्थ होली होने की संभावना है। बाजार में मुख्य सड़कों के साथ गली मोहल्लों में भी रंग और पिचकारियों की दुकानें भी सजी हुई हैं, जिनपर खरीदारों की भीड़ है।
जौ-गेहूं की बालियां भी खूब बिकीं
होलिका दहन के समय गेहूं, जौ, अलसी की बालियों को होली में अर्पित करने की परंपरा के चलते बाजार में इसकी जमकर बिक्री हुई। मेला मैदान चौराहा, कुंवर खुशवक्तराय चौराहा, हीरालाल धर्मशाला चौराहा, गुरुगोविंद सिंह चौराहे पर लोग नवा बेचते दिखाई दिए। यहां खरीदारों की भारी भीड़ रही।