पार्क भूमि में था अवैध कब्जा, मची रही अफरा तफरी
अमर उजाला ने प्रकाशित की भी प्रमुखता से खबर
जिला प्रशासन के निर्देश पर वन विभाग, पुलिस व एसएसबी ने संयुक्त रूप से अभियान चलाकर गौरीफंटा मंडी में वन भूमि पर अवैध रूप से फुटपाथ पर लगी सैकड़ों दुकानों को हटा दिया है। बता दें यह पार्क भूमि है जिस पर कुछ दुकानदार हजारों रुपया वसूल कर फड लगवा रहे थे। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसे खबर का असर माना जा रहा है।
बीते दिनों गौरीफंटा मंडी में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर अमर उजाला ने एक खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। खबर के बाद से प्रशासन का ध्यान इस ओर गया और उसके निर्देश पर पार्क प्रशासन ने पुलिस, एसएसबी के साथ संयुक्त अभियान चलाकर दुकानदारों को हटवाया। दुकानदारों का कहना है कि वन भूमि में फड़ लगाने के लिए एक से पांच हजार रूपए प्रतिमाह लिया जाता था जिसके बाद भी उनको उजाड़ दिया गया।
रेंजर दीपचंद्र ने बताया कि वन भूमि पर आबादी मंडी का विवाद सुप्रीम कोर्ट में है तथा यहां लगने वाली फड़ अवैध हैं। जो दुकानदार रुपया लेने का आरोप लगा रहे हैं वह सरासर गलत है। यह बात अलग है लेकिन मंडी के ही कुछ दुकान इन फुटपाथी दुकानदारों से हजारों रुपए की वसूली करते थे। अभियान में वार्डन कल्पनाथ गौतम, गौरीफंटा कोतवाल कृष्ण मुरारी शर्मा, एसएसबी से सुरेश जाट सहित तमाम वनकर्मी, पुलिस व एसएसबी के जवान मौजूद रहे। उधर गौरीफंटा मंडी हटने के बाद बनगवां में नेपाली ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ने से दुकानदारों के चेहरे खिल उठे हैं।