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महाशिवरात्रि पर्व आज, चार पहर की पूजा का विशेष महत्व

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लखीमपुर खीरी। महाशिवरात्रि को लेकर जिले भर के शिवालय सज गए हैं।
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बुधवार को दिन भर इसको लेकर तैयारियां चलती रहीं। शिवभक्त संकटा देवी मंदिर से लेकर शहर को सजाने संवारने में लगे रहे। शहर की प्रमुख सड़कों को रंगीन झालरों से सजाया गया है। इस बार महाशिवरात्रि पर्व शिव एवं सिद्घ योग में होगा। इस दौरान धनिष्ठा नक्षत्र भी विराजमान रहेगा। इससे बृहस्पतिवार को अद्भुत संयोग बन रहा है। देवकली तीर्थ के आचार्य पंडित प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि भगवान शिव का पूजन करने से अशुभ ग्रह शांत हो जाते हैं। यह व्रत विशेष फल देने वाला होता है। महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की पूजन का विशेष महत्व है। इसमें हर पहर की पूजा का एक विशेष विधान होता है, जिसका पालन करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।
मंदिरों में होती है चार पहर की विशेष पूजा
प्रथम पहर- इसकी पूजा शाम को प्रदोष काल में सूर्यास्त बाद की जाती है। इसका समय शाम छह बजकर 46 मिनट से रात नौ बजे तक है। इसमें पूजा करने से हर प्रकार के दोषों का नाश होता है।
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दूसरा पहर- दूसरे पहर की पूजा रात में होती है। इसका रात नौ बजकर 47 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट है। इस पूजा में शिव को दही अर्पित किया जाता है। इसमें भगवान शिव के मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए। इसमें पूजन से धन एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है।
तीसरा पहर- तीसरे पहर की पूजा मध्य रात्रि में होती है। इसका समय रात्रि 12 बजकर 48 मिनट से सुबह तीन बजकर 49 मिनट तक है। इसमें भगवान शिव की स्तुति करना शुभ माना जाता है। इससे हर मनोकामना पूरी होती है।
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चौथा पहर- चौथे पहर की पूजा ब्रह्ममुहूर्त में होती है। इसका समय सुबह तीन बजे से सूर्योदय तक है। इसमें पूजा करने से हर प्रकार के कष्ट नष्ट होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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