विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत बिजली विभाग ने शहर के उन उपभोक्ताओं से मीटर टेंपरिंग की स्वैच्छिक घोषणा करने की अपील की है, जो यह मानते हैं कि उनके मीटर में गड़बड़ी है। ऐसे उपभोक्ताओं पर बिजली विभाग की ओर से एफआईआर नहीं की जाएगी। साथ ही उनसे अधिकतम 12 माह की जगह सिर्फ तीन माह का ही अर्थदंड वसूला जाएगा।
मौजूदा समय में शहर के विभिन्न मोहल्लों में उपभोक्ताओं के घरों में लगे बिजली मीटरों की जांच कर उन्हें उतारा जा रहा है। चेकिंग में अधिकतर घरों के मीटरों में टेंपरिंग पाई जा रही है। कई मीटरों की सील टूटी हुई पाई गई है तो कई जगहों पर बिजली खपत के मुकाबले कम लोड पाया गया है। अब तक चेकिंग में तीन सौ से अधिक मीटर उतारे जा चुके हैं। जिसमें यह कमियां पाई गई हैं। अधिशासी अभियंता रजनीकांत मिश्रा ने बताया कि घरेलू मीटरों के उपभोक्ताओं द्वारा स्वैच्छिक घोषणा करने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। उनके मुताबिक मीटर में टेंपरिंग मिलने पर बिजली विभाग द्वारा समन शुल्क, फिर अर्थदंड वसूलने और एफआईआर की कार्रवाई की जाती है लेकिन स्वैच्छिक घोषणा करने पर सिर्फ समन शुल्क और तीन माह का ही अर्थदंड वसूला जाएगा। ईई ने इस संबंध में बिजली अधिकारियों को भी निर्देश दिया है। साथ ही यह उम्मीद जताया है कि इससे न सिर्फ उपभोक्ता कार्रवाई से बचेंगे बल्कि उन्हें अर्थदंड भी कम देना पड़ेगा।