लखीमपुर खीरी। मकर संक्रांति से लेकर लोहड़ी को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। मकर संक्रांति हिंदुओं की आस्था का पर्व है तो वहीं लोहड़ी सिखों का। इस बार लोहड़ी 13 जनवरी को, लेकिन खिचड़ी यानी मकर संक्रांति 14 की बजाय 15 जनवरी को होगी। सूर्य भगवान 14 जनवरी की रात आठ बजकर 43 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इससे खिचड़ी 15 जनवरी को होगा।
पर्व को लेकर बाजार सजने लगा है। दुकानों पर तिल के लड्डू, गजक और गुड़ की बनी सामग्री सज गई है। बता दें कि मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने की परंपरा है। इसदिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और धनु राशि से निकलकर मकर में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी मनाई जाती है। जो इस बार 13 जनवरी को मनाई जाएगी।
लोहड़ी
लोहड़ी पर्व 13 जनवरी को मनाया जाएगा। नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशु के लिए यह बेहद खास होता है। सिख समुदाय के लोग लोहड़ी की रात अग्नि जलाकर परिवार के साथ लोकगीत गाकर नए धान के लावे, मक्का, गुड़, रेवड़ी व मूंगफली आदि अग्नि को अर्पित कर परिक्रमा करते है। साथ ही एक दूसरे को लोहड़ी की बधाई देकर मंगल कामना करते हैं।
मकर संक्रांति का महत्व
देवकली तीर्थ स्थिति स्वर्गीय श्रीमती चंद्रकला आश्रम एवं संस्कृत विद्यापीठ के आचार्य पंडित प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि एक साल में 12 संक्रांतियां होती है। इसमें मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे शीत ऋतु का प्रभाव कम होने लगता है। मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना आदि पवित्र नदियों में स्नान कर खिचड़ी दान करना विशेष फलदायी माना जाता है