सृजन संस्था का आयोजन, कवियों ने सुनाईं अपनी सरस रचनाएं
साहित्यिक संस्था सृजन के तत्वावधान में नगर पालिका सभागार में सम्मान समारोह और काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आशीष तिवारी ने की। इसमें वरिष्ठ कवि राज किशोर पांडेय प्रहरी को सृजन सम्मान और एहितशाम हुसैन को सृजन युवा सम्मान से सम्मानित किया गया। अतिथि अमित श्रीवास्तव और अध्यक्ष आशीष तिवारी ने दोनों कवियों को सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
काव्य गोष्ठी में ज्ञानेंद्र वत्सल ने मां सरस्वती की वंदना पेश की। आननंद अग्निहोत्री ने कहा-बदलते दौर में बदली दोस्तों अब दोस्ती है। तौलते हैं तराजू में ये महंगी है या सस्ती है। सुदामा कृष्ण के किस्से रह गए अब किताबें हैं दोस्ती अब कहां, अब तो सिर्फ मतलब परस्ती है। रोहित मित्तल बोले कि इस मिलावटी दुनिया में सुगंध नाम की रह गई। कोई भी चीज सुगंधित कहां काम की रह गई।
संचालक ज्ञानेंद्र वत्सल बोले-मैं तुझमें हूं पता नहीं तुम मुझमें बहती रहती हो। ख्वाबों में तुम छुप छुप मेरे, आज भी मिलती रहती हो। अजय ने पढ़ा-जमाने की जफाओं ने हमें इतना सताया था, नहीं मिलते जो हमको तुम तो हम भी मर गए होते। प्रभात बाजपेयी ने पढ़ा-पिता की एक दुआ से तुम अगर वरदान पाओगे, उसी वरदान से तुम हर जगह सम्मान पाओगे।
अमित कैथवार बोले- मेरे देश में कुछ दल हैं जिनमे नेता कम जोकर ज्यादा है। मेरे गांव मेें कई बार लग्जरी गाड़ियां आई हैं क्योंकि मेरे गांव में वोटर ज्यादा हैं। राज किशोर पांडेय प्रहरी ने आज की राजनीति पर अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि सत्ता पाने के लिए बेच दिया ईमान, कृषि प्रधान इस देश में कुर्सी हुई प्रधान। इनके अलावा संजीव मिश्र व्योम, गौरव मिश्र, शोभित तिवारी और नमन भल्ला और आशुतोष श्रीवास्तव ने भी काव्य पाठ किया।