‘हे भगवान गरीबी दे तो जिंदगी न दे’ यह अल्फाज हैं, एक गरीब बेबस मजबूर मां और कमउम्र विधवा हुई एक नारी के। जो कि गरीब पति की चिता के लिए लोगों से गिड़गिड़ा रही थी। चंदा करके उसके पति की चिता जल सकी।
बेलाटापर निवासी 25 वर्षीय युवक रामचंदर अपनी पत्नी रूपरानी और चार वर्ष की मासूम लक्ष्मी के साथ एक झोपड़ी में रहता था। उसके पास मात्र 10 डिस्मिल जमीन थी। वह पीडब्ल्यूडी विभाग में दिहाड़ी पर मजदूरी किया करता था। जब वह कुछ कमाकर लाता था, तभी उसके घर का खर्च चलता था। गरीबी से परेशान रामचंदर को करीब 15 दिन पहले ऐसी बीमारी लगी की वह रुपयों के अभाव में इलाज भी नहीं करा पाया और उसकी मंगलवार मौत हो गई। पति की मौत से पत्नी रूपरानी पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। दाने-दाने को मोहताज पत्नी के सामने पति की लाश पड़ी थी। दाह संस्कार को उसके पास एक धेला तक नहीं था, जो लकड़ियों का इंतजाम कर पति की चिता जलवा सके। परेशान रूपरानी ने गांव वालों से गुहार लगाई तब जाकर उसके पति के शव का दाह संस्कार हो पाया। उसकी चीखों को सुनकर हर आंख नम हो गई थी।
ग्राम प्रधान अरविंद कुमार ने बताया कि पंचायत अधिकारी और लेखपाल से बात हो गई गरीब महिला को पारिवारिक लाभ दिलाने के साथ विधवा पेंशन, समाजवादी पेंशन के साथ-साथ हर तरह से सहयोग किया जाएगा।