अतिक्रमण के नाम पर उजाड़े गए फुटपाथ पटरी दुकानों ने तालाबों, कुंओं, अन्य जलस्त्रोतों और नालों पर अवैध रूप से कब्जा कर किए गए स्थाई अतिक्रमण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फुटपाथ पटरी दुकानदार समिति ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा कि लखीमपुर शहर का मूल स्वरूप बिगड़ गया है।
नगर पालिका, विधायकों, प्रभावशाली लोगों से साठगांठ कर पूंजीपतियों ने जल निकासी के लिए बनाए गए नालों को तोड़कर उन पर स्थाई रूप से अतिक्रमण कर व्यवसायिक भवनों का निर्माण कर रखा है। जबकि प्रशासन अतिक्रमण हटाने के नाम पर सिर्फ खोखों और चाय-पान की दुकानों को ही उजाड़ रहा है। स्थाई रूप से अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। नतीजतन आम नागरिकों की जाम की बड़ी समस्या से जूझना पड़ रहा है। दुकानदार समिति ने ज्ञापन में अतिक्रमण करने वाले वास्तविक दोषियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने और 1933-34 के नगर लखीमपुर के उपलब्ध मानचित्र के अनुरूप पुर्नस्थापित करने की मांग की है। समिति के अध्यक्ष बृजेश पटवा ने ज्ञापन में शहर में किए गए स्थाई अतिक्रमण वाले स्थलों का जिक्र भी किया है। साथ ही गरीब फुटपाथ पटरी दुकानदारों को उचित स्थान पर व्यवसाय संचालित करने के लिए सहयोग करने और अधिकारियों को स्थाई रूप से किए गए अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाने की मांग की गई है। समिति ने यह ज्ञापन मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, प्रमुख सचिव सहित कई अधिकारियों को भेजा है।