घटना के बाद ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए लाठी-डंडों के साथ तेंदुए को दौड़ाया, जिसके बाद वह मौके से भाग निकला। इससे बड़ी घटना टल गई। घायल ग्रामीणों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धौरहरा लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने मायाप्रकाश और भागीरथ को लखीमपुर रेफर कर दिया।
सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष निर्मल तिवारी और क्षेत्रीय वनाधिकारी नृपेंद्र चतुर्वेदी पुलिस और वन विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वन विभाग ने गांव और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों के अनुसार कबिरहा, नगरिया, इमिलिया और मजगई समेत करीब दस किलोमीटर के दायरे में तेंदुए की मौजूदगी से लोग भयभीत हैं। करीब दो सप्ताह पूर्व नगरिया गांव में भी तेंदुए ने एक घर के बाहर बंधी भैंस पर हमला कर उसे घायल कर दिया था।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए के डर से लोग खेतों में जाने से बच रहे हैं, जिससे आवारा पशु फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उधर, वन विभाग लगातार तेंदुए को पकड़ने का प्रयास कर रहा है, लेकिन वह हर बार टीम को चकमा देकर निकल जा रहा है। क्षेत्रीय वनाधिकारी नृपेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जा रहा है। साथ ही ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।