बा स्कूलों में मनमर्जी से वार्डेन का स्कूल से चले जाने का तरीका अब नहीं चलेगा। बीएसए ने शैक्षिक गुणवत्ता और व्यवस्था सुधार के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारियों को बढ़ाया है। अब वार्डेन और एकाउंटेंट को स्कूल छोड़ने से पहले बीईओ को सूचना देनी होगी। यही नहीं छुट्टी के प्रार्थनापत्र बीईओ के जरिए ही बीएसए को जाएंगे।
बीएसए डॉ. ओपी राय ने कस्तूरबा गंाधी आवासीय बालिका स्कूल में वार्डेन को स्कूल छोड़ने से पहले बीईओ को सूचना देना जरूरी कर दिया है। यही नहीं स्कूल के आंकिक लेखाकार (एकाउंटेंट) अब रजिस्टर में महज ओटी (आन-ड्यूटी) लिखकर जिले पर मौजूद रहने के तरीके पर भी लगाम लगाई है, बीएसए ने निर्देश दिए हैं कि लेखाकार जिले पर विभागीय कार्य से जाने या फिर छुट्टी पर जाने से पहले बीईओ को सूचित करेंगे। दरअसल अभी तक लेखाकार की हाजिरी जांचने का अधिकार बीईओ को नही था, अब नए नियम से लेखाकार भी बीईओ को सूचित करेंगे।
अल्ससंख्यक बच्चों को पढ़ाने के लिए मिलेंगे उर्दू शिक्षक
जिले के कस्तूरबा स्कूलों में अभी तक किसी भी उर्दू शिक्षक की नियुक्ति नहीं है, जबकि सभी स्कूलों में अल्पसंख्यक छात्रों की संख्या है। ऐसे में बीएसए ने बीईओ को निर्देश दिए हैं कि उर्दू शिक्षक की मांग होने पर वह बेसिक से शिक्षक भेज कर छात्राओं को पढ़वाएं, वहीं बॉ स्कूलों में शिक्षक स्टॉफ व व्यायाम शिक्षक की कमी होने पर बारी बारी से शिक्षकों को भेजकर पढ़वाया जाए।
लाईब्रेरी खोली जाएं हाल में, न बनने दें स्टोर रूम
बा स्कूलों में कोई भी स्टोर का सामान न हो, उसमें लाइब्रेरी, कंप्यूटर और टीएलएम का सामान रखकर हाल को शैक्षिक माहौल के लिहाज से तैयार कराएं। साथ ही बीईओ को निर्देश दिए हैं कि स्कूल में एसएमसी की बैठकें, खाने की गुणवत्ता, स्कूल के शैक्षिक स्तर पर विशेष नजर रखें। अब बेसिक के स्कूलों के साथ जिले के कस्तूरबा स्कूलों की भी ग्रेडिंग की जाएगी। जल्द ही स्कूलों के निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए हैं।