वन विभाग के पिंजड़े में फंसा आदमखोर बाघ
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चार लोगों और एक पशु को निवाला बनाने वाली बाघिन की जगह बाघ पिंजरे में कैद हो गया। बाघिन अभी तक पकड़ से बाहर है। वनाधिकारियों का कहना है कि बाघिन को पकड़ने के लिए अभियान अभी जारी रहेगा।
बाघिन को पकड़ने के लिए एक पिंजरा बाघिन के पहले शिकार महंत मोहनदास की कुटी के पास लगाया गया था। इसके अलावा आधा-आधा किलोमीटर की दूरी पर तीन और पिंजरे लगाए गए थे। बीती रात तिकुनिया रोड पर लगे पिंजरे में बाघ कैद हुआ है। बाघ को फंसाने के लिए पिंजरे में बकरा बांधा गया था।
बताते हैं कि जिस समय बाघ पिंजरे में कैद हुआ उस समय बाघिन भी साथ थी, जो काफी देर तक पिंजरे के आसपास मंडराती रही। वन विभाग ने किसी तरह उसे वहां से हटाया।
बाघिन के हटने के बाद पिंजरे में कैद बाघ को पिंजरा समेत ट्रक के जरिए करतनियाघाट वन्यजीव विहार ले जाया गया। दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर ने पिंजरे में कैद जानवर के बाघ होने की पुष्टि की है। बाघ पकड़े जाने की सूचना मिलते ही दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक, उप निदेशक बफर जोन सुंदरेश मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बाघ पकड़े जाने की सूचना प्रधान मुख्य वन संरक्षक और बाघ संरक्षण प्राधिकरण को दे दी है।
पिछले दस दिनों के अंदर चार इंसान और एक पशु बाघ का शिकार बन चुके हैं। बाघ हमले में दो मवेशी घायल हुए हैं। पग चिन्हों और कैमरे में ट्रैप हुई तस्वीरों के आधार पर वन विभाग ने हमलावर जानवर को बाघिन बताया था। बाद में बताया गया कि बाघिन एक नहीं दो हैं। जबकि अब बताया जा रहा बाघ और बाघिन का जोड़ा मिलकर शिकार कर रहे थे। इनमें बाघ पकड़ा गया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है बाघिन के पकड़ में न आने से खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए अभियान को अभी जारी रखा जाएगा और जल्दी ही बाघिन भी पकड़ी जाएगी।