विवादित ट्वीट के जरिये धार्मिक सद्भाव को बिगाड़ने और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली टिप्पणी को लेकर ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मो. जुबैर के खिलाफ दर्ज मामले में एसीजेएम ज्योति श्रीवास्तव ने शनिवार को मो. जुबैर की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और वर्गों के बीच शत्रुता बढ़ाने वाले बयान और टिप्पणियां लखीमपुर खीरी जिले में मोहम्मद जुबेर को भारी पड़ गई। उनकी ओर से अधिवक्ता हरजीत सिंह, सुरेंद्र कुमार और कुलदीप सिंह ने एसीजेएम अदालत में बहस करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आघात बताया और कहा कि सियासी रूप से उन्हें फंसाया जा रहा है। जो अपराध लगाए जा रहे हैं वह 7 वर्ष से कम की सजा वाले अपराध हैं। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी भी नहीं हो सकती थी।
वहीं सहायक अभियोजन अधिकारी केपी सिंह और अवधेश यादव की ओर से दलील दी गई कि सुशिक्षित समाज से ताल्लुक रखने वाले व्यक्तियों द्वारा यह अपराध किया जा रहा है, जिससे पूरे समाज की शांति व्यवस्था प्रभावित हुई। ऐसे ही वक्तव्य से दंगे-फसाद भड़क सकते थे। विवेचना अधिकारी ने पर्याप्त सबूत इकट्ठा कर केस डायरी में शामिल किए हैं। इस स्तर पर जमानत दिए जाने से समाज में गलत संदेश जाएगा। अदालती सुनवाई के बाद एसीजेएम ज्योति श्रीवास्तव ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
उधर, मोहम्मद जुबेर को पुलिस कस्टडी रिमांड में लेकर पूछताछ करने की मोहम्मदी पुलिस की अर्जी पर सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है।