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ट्रंच विधि: गन्ने की ‘खड़ी बुआई’ से कम की लागत

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लखीमपुर खीरी। जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर शीतलापुर गांव के युवा किसान दिलजिंदर सिंह ने जेट एयरवेज की इनफ्लाइट मैनेजर की नौकरी छोड़कर खेती में मन रमाया है। दिलजिंदर ने ट्रंच विधि से खेत में गन्ने की खड़ी बुआई (वर्टिकल) करके खेती में नवाचार किया है। वर्टिकल बुवाई इस प्रकार की गई है कि दक्षिण की तरफ से पर्याप्त सूर्य की रोशनी एवं तापमान मिलता रहे, जिससे अंकुरण सही हो और अधिक से अधिक कल्ले विकसित हो सकें। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह और रिटायर्ड आईएएस डॉ शंकर सिंह के साथ जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने शीतलापुर गांव पहुंचकर युवा किसान के खेती में नवाचार के प्रयोग को देखकर सराहना की।
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चीनी का कटोरा कहे जाने वाले जनपद के गांव की मिट्टी दिलजिंदर को गांव खींच लाई। इससे 2012 में दिलजिंदर ने आसमान की उड़ान को छोड़कर जमीन से नाता जोड़ लिया। वैज्ञानिक पढ़ाई का भरपूर प्रयोग जमीन पर उतारा और खेती में वैज्ञानिक विधियों को अपनाते हुए स्वयं के प्रयोग किए। इससे दिलजिंदर ने खड़ी बुआई विधि का नवाचार कर डाला। इस तकनीक को देखकर डीएम समेत अन्य अधिकारी भी चकित रह गए। अब तक बेड़ा गन्ना ही बोया जाता है। अपने प्रयोग के बारे में दिलजिंदर सिंह ने बताया कि कुदरत ने गन्ने की फसल को सीधे ऊपर की ओर बढ़ने वाला बनाया है, तो इसे लेटाकर क्यों बोया जाए। एक आंख की गुल्ली काटकर उसे खेत में खड़े तरीके से लगाते हैं। परंपरागत बुआई में जहां प्रति हेक्टेयर 60 क्विंटल बीज की खपत होती है, वहीं इस विधि से अधिकतम 15 क्विंटल बीज लगता है। इससे बीज की बचत करके किसान की लागत में 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की कमी आ जाती है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने इस विधि से बोये गन्ने की आंख से जब 12 से 15 स्वस्थ्य कल्ले निकले देखे तो हैरत में पड़ गए। दोनों अधिकारियों ने दिलजिंदर के प्रयासों की सराहना की है। शरदकाल में इस विधि से गन्ने की बुआई पर जोर देने पर अधिकारी विचार कर रहे हैं। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने कहा कि इस विधि से गन्ने में पानी की 50 प्रतिशत बचत होगी और लागत कम होने से आय बढ़ेेगी।
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