लखीमपुर खीरी। खीरी सांसद उत्कर्ष वर्मा ने आठ अगस्त को लोकसभा में उर्वरक आपूर्ति, कालाबाजारी, और सब्सिडी वितरण से संबंधित सवाल उठाए। सांसद ने रसायन और उर्वरक मंत्रालय से जिले में उर्वरकों की आपूर्ति की स्थिति, तस्करी रोकने के उपाय और किसानों के खातों में प्रत्यक्ष सब्सिडी हस्तांतरण की संभावना पर जानकारी मांगी।
हालांकि, सांसद उत्कर्ष वर्मा ने सरकार के जवाब को कागजी और हवा हवाई करार देते हुए इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि संसद में शुक्रवार को उन्होंने चार प्रमुख बिंदुओं पर सवाल उठाते हुए पूछा कि लखीमपुर खीरी जिले में यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस जैसे उर्वरकों की किस्म-वार आपूर्ति की मात्रा, उर्वरकों की तस्करी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।
क्या सरकार उर्वरक सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित करने पर विचार कर रही है। यदि प्रत्यक्ष हस्तांतरण की योजना नहीं है, तो इसके क्या कारण हैं।
उनका कहना है कि उनके सवालों पर रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जवाब में कहा कि उर्वरकों की आपूर्ति और वितरण का विवरण सभा पटल पर रखा गया है। उत्तर प्रदेश सरकार से प्राप्त जानकारी के आधार पर खरीफ मौसम एक अप्रैल से पांच अगस्त 2025 के दौरान लखीमपुर खीरी में उर्वरकों की स्थिति बढ़िया है।
जवाब में बताया गया कि यूरिया, डीएपी, एमओपी व एनपीकेएस उपलब्धता से अधिक है और बिक्री के बाद भी स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा तस्करी पर सरकार ने बताया कि काला बाजारी और तस्करी रोकने के लिए राज्य सरकारों को अधिकार दिए गए हैं। सतर्कता बरती जा रही है।
सब्सिडी हस्तांतरण पर सरकार ने कहा कि डीबीटी प्रणाली के तहत उर्वरक कंपनियों को पीओएस उपकरणों के माध्यम से बिक्री के आधार पर सब्सिडी दी जाती है। सभी किसानों को सब्सिडी दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराए जा रहे हैं और प्रत्यक्ष सब्सिडी हस्तांतरण की कोई योजना नहीं है।
सांसद उत्कर्ष वर्मा ने सरकार के सभी जवाबों को कागजी और हवा हवाई बताते हुए कहा कि यह जमीनी हकीकत नहीं हैं। जिले में कालाबाजारी चरम पर है किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है बल्कि उल्टे उन पर लाठियां चलाई जा रही हैं किसान खाद को लेकर बहुत परेशान हैं। उन्होंने सब्सिडी हस्तांतरण की मांग को दोहराया ताकि किसानों को सीधा लाभ मिले।