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खीरी जिले में बैसाखी पर टिका है लोकपाल

Sat, 11 Jul 2015 06:07 PM IST
लखीमपुर खीरी
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भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की जांच करने के लिए अधिकृत लोकपाल जिले में बैसाखी पर टिका है। विकास भवन में उपायुक्त मनरेगा के पड़ोस में लोकपाल के लिए एक कमरा तो अलाट कर दिया गया है, लेकिन मानदेय, वाहन, लेखन सामग्री, कम्प्यूटर आदि नहीं मिल रहा है। लोकपाल की शिकायत पर ग्राम्य विकास आयुक्त ने प्रशासन को पत्र भी भेजा फिर भी संसाधन नहीं उपलब्ध हो पा रहे हैं। जिसकी वजह से न सिर्फ जन शिकायतों की जांच प्रभावित हो रही है, बल्कि जिले में लोकपाल स्वरूप भी सिमटता जा रहा है।
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जिले में लोकपाल की तैनाती को एक वर्ष से अधिक का समय गुजर गया है, लेकिन इस दौरान मनरेगा लोकपाल की जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सका है। लोकपाल के पास विकास भवन में दफ्तर तो है, लेकिन मानदेय या यात्रा भत्ता नहीं मिल रहा है। यहीं नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में शिकायतों की जांच करने के लिए जाने को कोई वाहन भी नहीं दिया गया है। लेखन सामग्री, कम्प्यूटर आदि जरूरतें भी नहीं पूरी हुई हैं। इससे जिले में लोकपाल को मजबूती नहीं मिल पा रही है और न ही जन शिकायतों की ही नियमित जांच हो पा रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों में मौके पर जाकर लोकपाल को जांच करने में काफी दिक्कत हो रही हैं। पिछले दिनों ग्राम्य विकास आयुक्त कामरान रिजवी ने लोकपाल के जून 2014 और जनवरी 2015 के पत्र का हवाला देते हुए प्रशासन को पत्र भेजकर मानदेय और जरूरी संसाधन मुहैया कराने को कहा था, लेकिन अब तक प्रशासन ने लोकपाल की सुधि नहीं ली है। जिसकी वजह से लोकपाल जिले में सिर्फ बैसाखी पर ही चल रहा है। संसाधनों की कमी के कारण लोकपाल की जो सक्रियता होनी चाहिए वह दिखाई नहीं दे रही है।
सीडीओ नितीश कुमार ने बताया कि लोकपाल को संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निर्देश आ गया है। जो भी संसाधन या अन्य जरूरतें हैं, वह सभी चीजें उन्हें जिला सीतापुर से ही मिलना है। जल्द ही लोकपाल की जरूरतें पूरी हो जाएंगी।
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