- अगस्त में चार लोगों को इसी ने मारा था, पहले बाघिन बताया था
- आदमखोर घोषित कर जारी हुआ था डेथ वारंट
- अब लखनऊ के चिड़ियाघर में कटेगी उम्रकैद
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज में हाल ही में चार लोगों की जान लेने वाले बाघ को आखिर पकड़ लिया गया। अब तक वन विभाग के अफसर इसे बाघिन बता रहे थे। बुधवार दोपहर लगभग तीन बजे बाघ को ट्रैंक्विलाइज किया गया। इससे कुछ घंटे पहले ही बाघ का डेथ वारंट जारी किया गया था, अब जिंदा पकड़े जाने के बाद उसे पिंजड़े में लखनऊ के चिड़ियाघर भेज दिया गया। वहीं उसे आजन्म कारावास की सजा काटना होगी।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज तहत खरेहटा बीट के छेदीपुर गांव के आसपास सक्रिय इस बाघ 17 से 30 अगस्त के बीच एक किशोरी समेत चार ग्रामीणों को मार डाला, जो जांच में सिद्ध भी हो चुका है। एक दिन पहले ही मंगलवार को कठिना पुल के पास भरिगवां निवासी 60 वर्षीय जानकी प्रसाद को भी हमला कर मारा था। इसके बाद वन विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि इससे और इंसानों की जान को खतरा हो सकता है। इसके चलते वन विभाग को इसे आदमखोर घोषित करना पड़ा। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के प्राविधान के अनुसार बाघ के खात्मे के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक ओमेंद्र शर्मा ने नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान लखनऊ के उप निदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला और मुख्य वन सरंक्षक ईको डेवलपमेंट पीपी सिंह को नामित किया था। इसके साथ ही इसके लिए मौत की सजा मुकर्रर कर दी गई, लेकिन जिंदा ही पकड़ लिया गया।
ट्रैंक्विलाइज करने के बाद बाघ की एक्सपर्ट डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने पड़ताल की तो वह नर बाघ निकला। प्रथम दृष्टया बाघ किसी बीमारी से पीड़ित प्रतीत हो रहा है, जिसका परीक्षण और इलाज लखनऊ के चिड़ियाघर में किया जाएगा।
-वाईपी शुक्ला, डीएफओ साउथ।
केनाइन टूटे होने की वजह से कर रहा था इंसानों पर हमला
बाघ को पकड़ने के लिए आई लखनऊ की टीम में शामिल वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ डॉ. मसूख चटर्जी ने फिलहाल बाघ को आदमखोर मानने से इंकार करते हुआ कहा कि लखनऊ में पूरी स्वास्थ्य जांच होने के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकेगा। डॉ. चटर्जी ने बाघ के पकड़े जाने के बाद अमर उजाला से कहा कि लगभग तीन से साढ़े तीन वर्ष के बाघ का ऊपर का दांत (केनाइन) टूटा हुआ है, हो सकता है कि बाघ इसी कारण बड़े शिकार को छोड़कर छोटे शिकार कर रहा हो। हालांकि उसने दो पड्डे भी मारे हैं, जिससे अभी कुछ कहना संभव नहीं है।