लखीमपुर खीरी। जिले के पारंपरिक खाद्य उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक जनपद-एक उत्पाद की तर्ज पर एक जनपद-एक व्यंजन में खीरी के केला, गुड़, खीर मोहन और रसगुल्ले को शामिल करने की मंजूरी दे दी है।
जिले में पहली बार एक जनपद-एक व्यंजन के लिए इनका चयन किया गया है और उद्योग लगाने के लिए आवेदन मांगे गए हैं। उपायुक्त उद्योग विभाग ने केला, गुड़, खीर मोहन और रसगुल्ले से जुड़े कारोबारियों और नए लोगों से आवेदन की अपील की है। सरकार से वित्तीय सहायता देकर इन विशिष्ट पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि स्थानीय उद्यमियों को नए अवसर मिलने के साथ रोजगार का सृजन हो।
योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योगों से जुड़े उद्यमी एमएसएमई पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदक की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए और उसने किसी अन्य अनुदान योजना का लाभ न लिया हो। परिवार से केवल एक सदस्य को लाभ दिया जाएगा।
10 से 25 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान
25 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर 25 प्रतिशत या अधिकतम 6.25 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। 25 से 50 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर 20 प्रतिशत, 50 से 150 लाख रुपये तक 10 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रुपये और 150 लाख रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर 10 प्रतिशत या अधिकतम 50 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
बंगाल, बिहार व ओडिसा तक कारोबार
जिले के मैगलगंज के रसगुल्ले काफी मशहूर हैं और दूर-दूर से लोग इन्हें खाने आते हैं। मैगलगंज को रसगुल्लों का शहर भी कहा जाता है। धौरहरा के खीर मोहन को भी लोग खूब पसंद करते हैं। जिले में गुड़ और केला का उत्पादन भी काफी अधिक है। खीरी का गुड़ उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के साथ बिहार, बंगाल और ओडिसा तक सप्लाई होता है, जबकि केला हरियाणा सहित कई अन्य प्रदेशों में भेजा जाता है।
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ओडीओपी की तर्ज पर एक जनपद-एक व्यंजन की नई योजना शुरू की गई है। इसमें लखीमपुर खीरी का केला, गुड़, खीर मोहन और रसगुल्ले को शामिल किया गया। इसके लिए उद्योग केंद्र से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं।
-अभिषेक कुमार, सीडीओ