पसगवां के बाद तिकुनिया कांड ने कांग्रेस को दिया बड़ा माइलेज
पांच महीने में तीन बार खीरी आ चुकी हैं प्रियंका गांधी
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया कांड को लेकर यूपी समेत केंद्र की सरकार पर लगातार हमलावर रही कांग्रेस ने यूपी में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। शुरू से ही किसान आंदोलन के समर्थन में रही कांग्रेस तिकुनियां कांड की तासीर बखूबी समझती है। इसलिये दिल्ली में बैठे राहुल गांधी जहां तिकुनिया कांड को लेकर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी का इस्तीफ़ा मांग रहे हैं और उन्हें जेल भिजवाकर ही चैन से बैठने की बात कह रहे हैं। वहीं विधान सभा चुनावों से पहले कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को यूपी में भेजकर कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। खीरी से भूपेश बघेल की रैली की शुरुआत इसी रणनीति का हिस्सा है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री यूपी में चार रैलियां करने वाले हैं। 22 दिसंबर को इसकी शुरुआत खीरी के नकहा ब्लॉक के केवलपुरवा से होने जा रही है। इसके बाद वह लखनऊ के इटौंजा में रैली करेंगे। इसके बाद 23 दिसंबर को वह गोरखपुर और अयोध्या में रैली करेंगे। कांग्रेस ने इसे कार्यकर्ता प्रतिज्ञा रैली नाम दिया है। भूपेश बघेल का हेलिकॉप्टर आज पूर्वान्ह 11 बजकर 30 मिनट पर लखीमपुर पहुंचेगा, जहां से सड़क मार्ग से वह नकहा ब्लॉक के केवलपुरवा में जनसभा करेंगे। कांग्रेस ने इसे कार्यकर्ता प्रतिज्ञा रैली नाम दिया है। (संवाद)
तीन महीने में दूसरी बार खीरी में होंगे भूपेश बघेल
लखीमपुर खीरी। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल तिकुनिया कांड के तीन महीने के अंदर दूसरी बार जिले में आ रहे हैं। इससे पहले तीन अक्तूबर को हुए तिकुनिया कांड के बाद छह अक्तूबर को राहुल और प्रियंका गांधी के साथ मारे गए किसानों के घर पहुंचे थे। उस दौरान उनके साथ पंजाब के मुख्यमंत्री चरनजीत चन्नी भी मौजूद थे। दोनों मुख्यमंत्रियों ने मारे गए किसानों के पीड़ित परिवार को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का वादा भी किया था, जिसे बाद में पूरा किया गया और पीड़ित परिवारों को एक करोड़ की आर्थिक सहायता मिली।
कांग्रेस के लिए भूपेश बघेल इसलिए भी अहम हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार ने अभी अपने सिर्फ तीन साल पूरे किए हैं और वहां विधानसभा चुनाव में दो साल बाकी हैं, जबकि पंजाब में चुनाव यूपी के साथ-साथ होने हैं। ऐसे में पंजाब के सीएम चन्नी को यूपी में नहीं उतारा गया है, जबकि भूपेश बघेल कांग्रेस के लिए तुरुप का इक्का हैं। कांग्रेस सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के मॉडल को यूपी में पेश करना चाहती है। संवाद
चार महीने में तीन बार खीरी आ चुकी हैं प्रियंका गांधी
पसगवां कांड से लेकर तिकुनिया कांड तक चार महीने में खुद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी तीन बार जनपद का दौरा कर चुकी हैं। प्रियंका पहले जुलाई में पसगवां कांड की पीड़ित से मुलाकात करने आईं थीं, जिसका असर ये हुआ की पसगवां कांड की पीड़ित कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं, जबकि तिकुनियां कांड के पीड़ितों से मुलाकात कर उन्हें एक एक करोड़ की मुआवजा राशि उपलब्ध करवाई। वह अब भी अजय मिश्र टेनी की बर्खास्तगी पर अड़ी हुई हैं।
किसान बनाम ओबीसी फैक्टर भी बड़ी वजह
कांग्रेस किसानों के साथ संघर्ष की डोर को मजबूती से थाम कर आगे बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के 22 दिसंबर के दौरे को भी इसी चुनावी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस भले ही इसे कार्यकर्ता प्रतिज्ञा रैली का नाम दे रही हो, लेकिन इसके मूल में किसान आंदोलन ही है। उधर, ओबीसी वोट बैंक भी बड़ा फैक्टर है। ओबीसी से ताल्लुक रखने वाले बघेल की यह रैली सदर विधानसभा क्षेत्र के नकहा ब्लॉक में रखी गई है, जो कि पिछड़ा वर्ग बहुल क्षेत्र है। ऐसे में कांग्रेस एक तीर से दो शिकार साध रही है। बघेल की रैली के जरिए कांग्रेस पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के साथ किसानों में पैठ बनाने की जुगत में है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रह्लाद पटेल का कहना है कि भूपेश बघेल कांग्रेस के स्टार चुनाव प्रचारक हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने विकास का मॉडल पेश किया है। कांग्रेस जाति और धर्म से ऊपर उठकर विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ती रही है। इस रैली के माध्यम से भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल को जनता के सामने रखेंगे। कांग्रेस यदि प्रदेश की सत्ता में आई तो यहां भी छत्तीस गढ़ का विकास मॉडल यहां लागू किया जाएगा।