जिले में मानक के अनुसार बारिश न होने से खरीफ की फसलों पर सूखे की मार पड़ने की आशंका है। सितंबर माह में पखवाड़े से अधिक दिन बीतने के बावजूद वर्षा न के बराबर हुई, जिससे दिन में तेज धूप निकलने के साथ ही मौसम गर्म बना है। इससे उत्पादन में कमी आने की संभावना बन गई है। वहीं जिला प्रशासन ने सूखे की स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी तक राहत के दावे फाइलों में ही सिमटे हैं। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जून से अगस्त 2015 तक 726.8 मिमी के सापेक्ष 618.2 मिमी वर्षा हुई है, जबकि सितंबर में मात्र 27.7 मिमी वर्षा हुई है।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक जून से अगस्त तक वर्षा मानक से कुछ कम रही लेकिन इसकी कमी को सिंचाई के अन्य साधनों जैसे नहर, ट्यूबवेल आदि से पूरा कर लिया गया। सबसे ज्यादा खराब स्थिति सितंबर में वर्षा न होने से हुई है, क्योंकि सितंबर में ही धान के पौधों की बढ़वार होने के साथ ही बालियों का बनना शुरू होता है। लिहाजा सितंबर में वर्षा का खरीफ फसलों के लिए काफी महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी से वर्षा 27.7 मिमी हुई है, जो किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
एडीएम एसपी सिंह ने बताया कि सूखे से निपटने की रणनीति बना ली गई है।
नलकूप, सिंचाई और बिजली विभाग को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं, जिसमें
नवनिर्मित नलकूपों को शीघ्र चालू कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सूखे
की स्थिति में बुवाई के लिए कृषि विभाग ने तोरिया बीजों की व्यवस्था की है।
खरीफ फसलों का रकबा
जिले में खरीफ 2015 में 160813 हेक्टेअर धान, 4630 हेक्टेअर दलहन, 10503 हेक्टेअर तिलहन समेत अन्य फसलों का 183778 हेक्टेअर बुवाई लक्ष्य के सापेक्ष 160813 हेक्टेअर धान की बुवाई हुई है। इसी तरह 4631 हेक्टेअर दलहन और 10503 हेक्टेअर तिलहन की बुवाई की गई है।