क्या है काल सर्प दोष कैसे करें निवारण
पंडित प्रमोद प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि जन्म कुंडली के बारह भावों में विभिन्न ग्रहों की स्थितियां बनती हैं। इनके आधार पर विश्लेषण करने पर योग बनते हैं। इन्हीं योगों में एक स्थिति बनती हैं कालसर्प दोष की।
काल सर्पयोग में काल अर्थात राहु के नक्षत्र के स्वामी 'काल' और सर्प अर्थात केतु के नक्षत्र स्वामी अश्लेषा के स्वामी सर्प से मिल कर बनता है। इस योग में राहु और केतु के बीच सभी गृह आते हैं। इसीलिए इन दोनों छाया ग्रहों का जातक के सम्पूर्ण भाग्य पर प्रभाव पड़ता है। कालसर्प योग से जातक के सभी कार्यों में बाधा आती है। कड़ी मेहनत का कोई परिणाम नहीं निकलता, संतान से कष्ट मिलता है और शत्रु हावी होने लगते हैं।
कालसर्प दोष की शांति करना बहुत आवश्यक हैं। सुखमय जीवन के लिए किसी विद्वान पुरोहित से मिलकर इस दोष की शांति कराना चाहिए।
12 प्रकार के होते हैं कालसर्प योग
प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि कालसर्प योग प्रमुख 12 प्रकार का होता हैं और विभिन्न रूपों को जोड़कर 3456 प्रकार का (आंशिक रुप से) पाया जाता हैं। 12 भावों के हिसाब से पूरे बारह कालसर्प योग बनते हैं।
1- अनंत कालसर्प योग
2- कुलिक कालसर्प योग
3- वासुकि कालसर्प योग
4- शंखपाल कालसर्प योग
5- पद्म कालसर्प योग
6- महापद्म कालसर्प योग
7- शेषनाग कालसर्प योग
8- विषाक्त कालसर्प योग
9- घातक कालसर्प योग
10- तक्षक कालसर्प योग
11- कर्कोटक कालसर्प योग
12- शंखनाद कालसर्प योग