ग्रामीण इलाकों में बिजली सप्लाई यूं ही नहीं बदहाल है, बिजली विभाग के पास सप्लाई व्यवस्था सुधारने वाले अवर अभियंताओं की भारी कमी है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लखीमपुर डिवीजन के एक अभियंता पर चार उपकेंद्रों का चार्ज है। गोला डिवीजन के मुकाबले लखीमपुर डिवीजन में अभियंताओं की ज्यादा कमी है। इसी को देखते हुए मीटर अनुभाग के एसडीओ और जेई को अतिरिक्त जिम्मा सौंपा गया है। फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की बिजली संबंधी दिक्कतें दूर नहीं हो पा रहीं हैं।
जिले के लखीमपुर डिवीजन में 14 बिजली उपकेंद्र हैं, जिन पर कुल सात जेई ही तैनात हैं। शहर के गढ़ी उपकेंद्र पर काफी समय से एक जेई की दरकार है। इसी तरह मितौली, बेहजम, कैमहरा उपकेंद्र पर किसी जेई की तैनाती न होने के कारण बसैगापुर में तैनात जेई अब्दुल जब्बार को चार्ज साैंपा गया है। वहीं धौरहरा, ढकेरवा, निघासन और तिकुनियां क्षेत्र की बिजली व्यवस्था संभालने के लिए भी एक-एक जेई तैनात हैं।
लखीमपुर से गोला डिवीजन के हालात कुछ हदतक ठीक है, यहां 18 बिजली उपकेंद्रों पर 11 जेई तैनात हैं। फिर भी सात अभियंताओं की कमी है। डिवीजन के ग्रामीण इलाकों की बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए आठ जेई पर दो-दो उपकेंद्र्र की व्यवस्था संभालने का जिम्मा है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले के गांवों में बिजली सप्लाई की स्थिति क्यों बिगड़ती जा रही है।
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क्या पड़ रहा है असर
-हर माह राजस्व वसूली में आ रही दिक्कत
-गर्मी को देखते हुए नहीं दुरुस्त की गईं बिजली लाइनें
-फुंके ट्रांसफार्मरों को बदलने में हो रही लापरवाही
-बिजली उपकेंद्रों पर संविदा कर्मियों की मनमानी
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लखीमपुर डिवीजन में अवर अभियंताओं की काफी कमी है, लेकिन इससे किसी तरह का काम प्रभावित नहीं हो रहा। कमी को देखते हुए मंडल स्तर के अधिकारियों से अभियंता की मांग की गई है। सप्लाई व्यवस्था में सुधार के लिए बिजली उपकेंद्रों और कर्मचारियों की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। बेहजम और मितौली उपकेंद्र के लिए एक नए जेई की तैनाती की गई है।
-आरबी सिंह, एसडीओ