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बढ़ती गतिविधियों के चलते दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन में होगी भेड़ियों की गणना

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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन में अब भेड़ियों की भी गणना की जाएगी। अभी तक जिले में भेड़िये की रिपोर्टिंग न होने के कारण भेड़िये को गणना के बाहर रखा जाता था। हाल ही में इनकी बढ़ती गतिविधियों के कारण वन विभाग का इस प्राणी की ओर ध्यान गया है। इसकी वजह से भेड़ियों की गणना कराये जाने का निर्णय लिया गया है। वन विभाग ने इनकी संख्या और वितरण क्षेत्र का पता लगाने के लिए कैमरे लगाए हैं।
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हाल ही में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की धौरहरा रेंज के चकदहा गांव में एक भेड़िये ने हमला कर दो बच्चों को गंभीर घायल कर दिया था। लेकिन लोग तेंदुए के हमले का अनुमान लगा रहे थे। बाद में जब वन कर्मियों ने मौके पर मिले पगचिह्न की जांच की तो यह पगचिह्न भेड़िये के निकले। इससे पहले धौरहरा रेंज के ही सिसैया चौराहे के निकट सड़क हादसे में एक भेड़िया गंभीर रूप से घायल हो गया था। वन विभाग ने उसे रेस्क्यू कर लखनऊ चिड़ियाघर पहुंचाया, जहां वह अब स्वस्थ है। इससे पहले बफरजोन की भीरा रेंज के बिजुआ क्षेत्र में भेड़िया होने की रिपोर्टिंग हुई थी।
अब कई जगह भेड़िये की मौजूदगी का पता लगने के बाद वन विभाग इस नतीजे पर पहुंचा है कि डीटीआर बफरजोन में भेड़ियों की अच्छी संख्या हो सकती है। इसलिए इसकी गणना करने का निर्णय लिया गया। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के जिस इलाके में भेड़िया की मौजूदगी पाई गई है वहां पर कैमरे लगा दिए गए हैं। ताकि भेड़िये की संख्या और लोकेशन का पता लगाया जा सके। डीटीआर बफरजोन के डीडी डॉ. अनिल कुमार पटेल का कहना है कि इससे पहले जिले में भेड़िया की रिपोर्टिंग नहीं हुई थी। इसलिए इसे गणना में शामिल नहीं किया जाता था। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर वन्यजीवों की गणना में भेड़िये को भी शामिल करने का फैसला लिया गया है।
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बलरामपुर जिले के सुहेलवा में है भेड़ियों की अच्छी संख्या
भेड़िया मूलत: मांसाहारी वन्यजीव है। यह प्राय: बाघ और तेंदुए के छोड़े हुए शिकार को खाता है। साथ ही खरगोश आदि छोटे जानवरों का शिकार कर अपना पेट भरता है। यह जीव कुत्तों की नस्ल का होता है और खासकर जंगल के आसपास बाहरी इलाकों में रहता है आबादी के निकट होने के कारण यह बच्चों पर भी हमला कर देता है। बलरामपुर जिले के सुहेलवा वन प्रभाग भेड़िये की अच्छी संख्या पाई जाती है। खीरी जिले में भी दशकों पहले भेड़ियों की अच्छी संख्या थी। लेकिन बागों और झाड़ियों के खत्म हो जाने से अब इनकी संख्या में काफी कमी आई है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में अभी तक भेड़िये की रिपोर्टिंग नहीं थी। इस वजह से इन्हें गणना में शामिल नहीं किया जाता था। अब धौरहरा और भीरा रेंज में भेड़िये की सक्रियता के चलते इनकी गणना कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए कैमरे भी लगाए गए हैं।
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- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।
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