बांकेगंज। नेपाल से आए उत्पाती हाथी पिछले दो दिन से बार-बार इधर-उधर खदेड़े जाने के कारण आक्रामक हो उठे हैं। मंगलवार भोर में पहाड़नगर गांव में उत्पात मचाने के बाद एक्सपर्ट ट्रैकर्स द्वारा खदेड़े जाने के बाद जंगल लौटते वक्त रास्ते में वन विभाग के वॉच टावर की सीढ़ियां तोड़ दीं। आबादी के पास लगातार उत्पात से ग्रामीणों में दहशत है।
किशनपुर सेंक्चुरी के मड़हा जंगल में करीब दस दिन से डेरा डाले इन हाथियों को एक्सपर्ट ट्रैकर्स ने रविवार रात जंगल से बाहर नहीं निकलने दिया। बीती रात हाथियों ने एक बार फिर निगरानी टीमों को चकमा दिया। उनके बाहर निकलने के संभावित रास्तों पर वन कर्मी और ट्रैकर्स निगरानी करते ही रह गए। मंगलवार भोर में करीब तीन बजे हाथी तीसरे रास्ते से जंगल से निकलकर बांकेगंज कस्बा से कुछ दूरी पर पहाड़नगर गांव के पास पहुंच गए। वहां कई किसानों की धान और गन्ने की फसल रौंद डाली। किसान दिलबाग सिंह के खेत में लगी बोरिंग सूंड़ से उखाड़कर पंपिग सेट तोड़ दिया। इसके अलावा खेतों में फसल रखवाली के लिए बने कई मचानों को तोड़ डाला। उनके चिंघाड़ सुनकर निगरानी में लगी टीमें दंग रह गईं। दो अलग-अलग दिशाओं में इनकी निगरानी कर रही वन कर्मियों और ट्रैकर्स की टीमें आनन-फानन में मौके पर पहुंची। फिर हाथियों के झुंड पर टार्च की तेज रोशनी डालकर और मुंह से विशेष आवाजें निकालीं तो हाथी वहां से हट गए। मगर जंगल लौटते समय नकुला में वन विभाग के वॉच टावर पर इन हाथियों ने गुस्सा निकाला। टावर पर चढ़ने के लिए बनी सीढ़िया तोड़ दीं और मचान को भी तोड़ने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुए। इसके बाद झुंड जंगल के अंदर चला गया।
बाल-बाल बचे रेंजर, वन कर्मी और ट्रैकर्स
सोमवार शाम रेंजर आरपी सिंह, केपी सिंह, वन्यजीव रक्षक राजेश यादव, आकाश खरवार के अलावा ट्रैकर्स की एक टीम नकुला वॉच टावर से हाथियों के मूवमेेंट और लोकेशन पर नजर बनाए हुए थी। इस बीच जंगल वापस जा रहे हाथी नकुला की ओर बढ़े। यह संयोग ही था कि इससे कुछ देर पहले ही निगरानी टीमें टावर से नीचे उतरकर दूसरी ओर जा चुकी थीं। इस बीच वहां गुस्से में पहुंचे हाथियों ने नकुला वॉच टावर पर धावा बोलकर सीढ़ियां तोड़ दी और मचान गिराने की कोशिश की।
प्रयास है कि हाथी आबादी को ओर अपना रुख न कर सकें और न ही किसानों की फसल को रौंदे। वन कर्मी और पश्चिम बंगाल से आए एक्सपर्ट ट्रैकर्स टीम को 24 घंटे बारी-बारी से हाथियों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। जिन किसानों की फसलों का नुकसान हुआ हैं उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। -डॉ. अनिल कुमार पटेल, डीडी, डीटीआर बफरजोन।