बांकेगंज। प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में वन विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसमें दुधवा टाइगर रिजर्व के प्राचीन वृक्षों के बीज संरक्षित कर नई पौध तैयार होगी। फिर उसे जंगल में रोपा जाएगा, ताकि इन प्राचीन वृक्षों की जींस सुरक्षित रहें। इसके लिए ऐसे वृक्षों को चिह्नित करने का काम तेज हो गया है। इसमें पुराने साल और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के पेड़ों को शामिल किया जा रहा है।
वन विभाग यूपी जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) बोर्ड की पहल पर दुधवा टाइगर रिजर्व की तीनों डिवीजन दुधवा नेशनल पार्क, बफरजोन और कतर्निया घाट में ऐसे 18 पुराने वृक्षों का चयन किया है जो 100 से लेकर 350 साल से ज्यादा पुराने हैं। इनमें साल, बरगद, पीपल, पाकड़, कुसुम, काकड़, आम आदि के पेड़ शामिल हैं। कुछ ऐसे भी अजीबो गरीब पेड़ मिले हैं जिनकी खूबियों के बारे में सामान्य तौर पर लोग नहीं जानते। वन विभाग यूपी बायोडायवर्सिटी के सहयोग से पुराने वृक्षों के बीजों को इकट्ठा कर उनसे पौध तैयार करेगा। उन पौधों को जंगल में ही उपयुक्त स्थानों पर रोपा जाएगा। इससे जंगल में लंबे जीवन वाले नए पेड़ तैयार होंगे। इसका मकसद जंगल को विस्तार देकर दीर्घजीवी बनाना है। वन विभाग के अफसरों का मानना है कि इससे जंगल की गुणवत्ता में सुधार होगा। लंबी उम्र वाले पेड़ वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करेंगे।
मिला गुदगुदी वाला वृक्ष..
डीटीआर के कतर्निया घाट डिवीजन में 60 साल से भी अधिक पुराना रैनडिया (गुदगुदी वाला वृक्ष) मिला है। इसके तने पर गुदगुदी करने से पूरे पेड़ की पत्तियां हिलने लगती हैं। ऐसा लगता है कि जैसे पेड़ हंस रहा हो। इस बाबत पर्यावरणविद डॉ वीपी सिंह का कहना है कि जीवों की तरह वनस्पतियों और वृक्षों में भी प्राण होते हैं। और उनमें भी संवेदनशीलता होती है। इसी संवेदनशीलता के चलते ये पेड़ गुदगुदी महसूस करता है और स्पंदन करने लगता है।
डीटीआर की इन रेंजों में हो रहा पुराने पेड़ों का चिन्हीकरण..
दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन, दुधवा नेशनल पार्क और कतर्निया घाट डिवीजन के किशनपुर सेंक्चुरी, दुधवा, उत्तरी और दक्षिणी सोनारीपुर, मैलानी, भीरा आदि रेंजों में वृक्षों के चिन्हीकरण का काम हो रहा है। अभी तक कुल 18 वृक्ष चिह्नित किए जा चुके हैं। अन्य वृक्षों की तलाश की जा रही है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में कई ऐसे दुर्लभ प्रजाति के वृक्ष हैं जिनका अपना अलग महत्व है। वन विभाग ने इसे प्राकृतिक विरासत मानकर यूपी बायोडायवर्सिटी बोर्ड के सहयोग से संरक्षित करने की योजना बनाई है। ताकि जंगल को और अधिक गुणवत्ता परक और दीर्घजीवी बनाया जा सके।
संजय पाठक, फील्ड डाइरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व।