एनडीपीएस जैसे संगीन मामले में भी लापरवाही बरतने और गैर जिम्मेदाराना ढंग से तफ्तीश करने पर अपर जिला जज हाजी अशरफ अंसारी ने तीन पुलिस कर्मियों की कार्रवाई पर तीखी नाराजगी जताई है। तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए एसपी को निर्देशित किया है।
एडीजे हाजी अशरफ अंसारी की अदालत में एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि एक जून 2008 को एसआई जितेंद्र सिंह सेंगर ने दो पुलिस कर्मियों के साथ गश्त के दौरान गोला थाना क्षेत्र में लखीमपुर बस अड्डे के पास गोला थाने के गांव बिजौली निवासी सुशील को 100 ग्राम नशीले पाउडर और दस नशीली टेबलेट सहित गिरफ्तार किया था। अदालत ने बरीकी से पड़ताल शुरू की तो पुलिस कहानी में झोल ही झोल नजर आने लगा, जैसे नशीले पाउडर के 12 पैकेट बरामद हुए थे लेकिन सेंपल केवल एक पैकेट से लिया गया, सेंपल में दस ग्राम पाउडर सीज किया गया था लेकिन जांच के लिए जब झिल्ली खोली गई तो साढे़ छह ग्राम ही पाउडर मिला, बस अड्डे के पास से बरामदगी कही जा रही है लेकिन जनता के गवाह नही लिए गए। नशीली दवा की दस टेबलेट की स्टिप बताई गई लेकिन तीन टेबलेट गायब मिलीं, धारा 50 के अनुपालन में किसी राजपत्रित अधिकारी के समक्ष तलाशी लिए जाने की अनिवार्यता के बावजूद पुलिस टीम ने अकेले ही तलाशी लेकर पूरी कार्यवाही मुक्कमल कर ली। अदालत ने अपने निष्कर्ष में लिखा कि कहीं अन्यत्र बरामदगी होने के बाद पुलिस कर्मियों ने पुलिस प्रपत्रों में स्थान ही बदल दिया है। कोर्ट ने आरोपी को बरी करते हुए एसआई जितेंद्र सिंह सेंगर, एसआई केसी गुप्ता, कांस्टेबल मनोज कुमार यादव को अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही बरतने, पदीय कर्तव्यों का निर्वहन न करने का दोषी पाते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के लिए एसपी को निर्देशित किया है।