एक ही मार्ग पर निर्माण कार्य के लिए दो अलग-अलग संस्थाओं द्वारा टेंडर निकालने के मामले में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के जेई यावर हुसैन की भूमिका संदिग्ध मिली है। डीएम किंजल सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जेई के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। साथ ही आरोपी जेई को सांसद/विधायक निधि के कार्यों से डिबार कर दिया गया हैै।
बता दें कि अमर उजाला ने 19 मार्च 2015 के अंक में ‘एक कार्र्य के लिए दो संस्थाओं ने निकाले टेंडर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, जिसमें एक कार्य के लिए दो संस्थाओं ने अलग-अलग प्रस्ताव बनाकर टेंडर प्रक्रिया कराने का जिक्र किया गया था। बताते चलें कि निघासन क्षेत्र के गांव बनवीरपुर जिला पंचायत से 324 मीटर लंबाई में इंटरलॉकिंग सड़क बनाने का प्रस्ताव पास हुआ था, जिसके बाद जिला पंचायत ने राज्य वित्त आयोग से निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया था। इसके बाद सांसद खीरी के प्रस्ताव में बनवीरपुर गांव में पंचायत घर से राइस मिल तक 324 मीटर लंबाई में 20.27 लाख की लागत से इंटरलॉकिंग कार्य स्वीकृत कराया गया। निर्माण एजेंसी ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के र्जेई यावर हुसैन ने जिला पंचायत द्वारा निर्माण कार्य शुरू कराए जाने के बावजूद विभागीय अधिकारियों को अंधेरे में रखा और टेंडर प्रक्रिया भी करा दी थी। इसका खुलासा डीआरडीए विभाग के र्जेई आरसी गुप्ता की जांच में हुआ था, जिसके बाद सीडीओ नितीश कुमार ने सांसद निधि के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। पीडी डॉ. दिनेश सिंह ने बताया कि जेई के विरुद्ध की गई कार्रवाई से संबंधित विभाग के अधिकारी को अवगत कराया गया है, जिसमें जेई यावर हुसैन को सांसद/विधायक निधि के कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया गया है।