बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की जीपीएफ कटौती का कोई हिसाब नहीं है। शिक्षकों को न तो जीपीएफ की लेखा पर्ची मिलती है और न ही उनकी पासबुक दी जाती हैं। इस कारण सबसे ज्यादा परेशान सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। हालत यह है एक साथ नौकरी शुरू करने वाले शिक्षकों की कटौती तो बराबर है लेकिन मिलने वाले जीपीएफ में जमीन-आसमान का अंतर है।
बताते चलें कि शिक्षकों के सेवाकाल में वेतन का 10 प्रतिशत हिस्सा जीपीएफ में कटता है नियमता शिक्षकों को जीपीएफ की पासबुक मिलनी चाहिए। इस पर उनका हिसाब और उनसे की जाने वाली कटौती अंकित रहनी चाहिए। इसके लिए शिक्षकों ने कई बार आंदोलन किया। कई बार जिले के अधिकारियों से मिलकर समस्या बताई लेकिन समाधान नहीं हुआ। शिक्षक की सेवानिवृत्ति पर लेखा विभाग के बाबू जितना हिसाब बना दें वही लेना शिक्षक की मजबूरी है। सेवानिवृत्त शिक्षक रामनिवास तिवारी बताते हैं कि उनकी और पिपरिया निवासी प्रेमनाथ वर्मा की ट्रेनिंग और विभाग में नियुक्ति एक साथ 1972-73 में हुई थी। दोनों लोग एक साथ सेवानिवृत्त हुए लेकिन सेवानिवृत्त होने के बाद प्रेमनाथ वर्मा को जीपीएफ के लगभग 10 लाख मिले जबकि राम नरेश तिवारी को लगभग 4,88,000 रुपये ही मिले। रामनिवास तिवारी से लगभग दो वर्ष पहले नौकरी शुरू करने वाले शिवबालक राम को सेवानिवृत्ति पर लगभग 11.5 लाख रुपये मिले। इन दोनों शिक्षकों की तुलना में राम निवास तिवारी को मिलने वाली धनराशि आधी भी नहीं है। रामनिवास तिवारी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी और लेखाधिकारी सहित कई अधिकारियों से हिसाब की मांग की लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने तत्कालीन सीडीओ सुरेंद्र विक्रम सिंह से मिलकर अपनी व्यथा बताई सीडीओ ने आदेश भी किया लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक जीपीएफ का हिसाब नहीं मिला। राम निवास तिवारी इसके पीछे मुख्य वजह भ्रष्टाचार बताते हैं। रामनिवास तिवारी कहते हैं यदि बाबुओं को खुश नहीं कर पाए तो जो उनकी मर्जी होगी वही भुगतान बना देंगे। राम निवास तिवारी बताते हैं यह समस्या अकेले उनकी नहीं है बहुत से शिक्षक इस समस्या से परेशान हैं।
बन रहीं हैं जीपीएफ पासबुक
इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग के लेखाधिकारी डीपी सिंह बताते हैं कि जीपीएफ में तमाम शिक्षक अग्रिम आदि लेते हैं इसलिए सभी का भुगतान एक जैसा नहीं हो सकता है। सभी शिक्षकों की जीपीएफ की पासबुक बनवाने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है। जल्दी ही सभी शिक्षकों की जीपीएफ पासबुक बन जाएंगी।