उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की शाखा मितौली में किसानों की लोनिंग के नाम पर हुए घोटाले में समाज कल्याण विभाग के ब्लाक स्तरीय कर्मचारियों की भूमिका संदेह के दायरे में आ गई है। स्पेशल कंपानेंट प्लान के तहत अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम से 20-20 हजार की लोनिंग की है, जिसमें नियम कायदे ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। जिस तरह जांच आगे बढ़ रही है, उसी तरह नए तथ्य सामने आ रहे हैं और बैंक अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ ही संबंधित विभागों के कर्मचारी बेनकाब हो रहे हैं। अब तक करीब 500 किसानों के नाम पर दोहरा-तिहरा ऋण निकालने के मामले टीम की पकड़ में आ चुके हैं।
कर्जा माफी योजना में घोटाले का पेंच फसने से पांच बैंक शाखाओं के 27,580 पात्र किसानों को कर्जा माफी का लाभ अब तक नहीं मिल सका है। इसके चलते किसानों को दूसरी बैंकों से लोन नहीं मिल पा रहा है और न ही सहकारी ग्राम विकास बैंक से अदेय प्रमाण पत्र निर्गत हो रहा है। इस मामले में डीएम के आदेश पर तीन सदस्यीय कमेटी जांच कर रही है। सरकार ने 31 मार्च 2012 से पहले किसानों पर 50 हजार रुपये तक का कर्ज माफ किया था, जिसके तहत अब तक चार बैंक शाखा लखीमपुर, बेहजम, शारदानगर और निघासन के समस्त पात्र 18211 किसानों का कर्जा माफ हो चुका है, जबकि मोहम्मदी बैंक शाखा का आंशिक यानी 201 किसानों का कर्जा माफ हुआ है। वहीं मितौली, गोला, पलिया और धौैरहरा के एक भी किसान को कर्जामाफी का लाभ नहीं मिला है। इससे 27,580 किसानों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
एआर कोआपरेटिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि मितौली बैंक शाखा की अभी जांच
जारी है, जिसमें स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत किसानों को दोहरा-तिहरा लाभ
देने के मामले सामने आए हैं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट डीएम को सौंपी
जाएगी।
98.04 करोड़ होना था कर्जामाफी
जिले की नौ बैंक शाखाओं के 45992 किसानों की कर्जामाफी की जानी थी, जिसके लिए 98 करोड़ चार लाख 76 हजार 467 रुपये की डिमांड सरकार से की गई थी। अब तक 18412 किसानों का 39 करोड़ 31 लाख 89 हजार 322 रुपये कर्जा माफ हुआ है।