खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लिए पात्र गृहस्थियों के चयन में पूर्ति विभाग के
पसीने छूट रहे हैं। मार्च के अंत तक यह काम पूरा कर शासन को पात्रों की
सूची भेजी जानी है लेकिन अभी तक यह काम प्रारंभिक दौर में ही है। पात्र
गृहस्थियों के चयन में लगाए गए कर्मचारी इस काम में दिलचस्पी नहीं ले रहे
हैं इस कारण काम जहां का तहां अटका हुआ है।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के
तहत ग्रामीण आबादी का 79.56 फीसदी और शहरी क्षेत्र की 64.43 फीसदी आबादी को
आच्छादित किया जाना है। ग्रामीण क्षेत्र में वर्ष 2011 में हुई सामाजिक और
आर्थिक गणना को आधार बनाया गया है, जबकि शहरी क्षेत्र में पात्र
गृहस्थियों के चयन की जिम्मेदारी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को सौंपी गई
है लेकिन ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में यह काम बेहद सुस्ती के
साथ चल रहा है।
डीएसओ डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि जिन राशनकार्ड
धारकों के डेटा का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है उनकी सूची कोटेदारों को
उपलब्ध करा दी गई है। उन्हें आनलाइन आवेदन करने की जरूरत नहीं है। उन्हें
परिवार की वरिष्ठ मुखिया के नाम से आवेदन करना होगा। ग्रामीण क्षेत्र के वे
लोग जो वर्ष 2011 की सामाजिक और आर्थिक गणना के अनुसार पात्रता सूची से
बाहर है लेकिन खाद्य सुरक्षा की पात्रता में आते हैं तो वे संशोधन के लिए
अपना आवेदन लेखपाल या ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को आवेदन दे सकते हैं।
खाद्य
सुरक्षा अधिनियम के तहत वरिष्ठ महिला मुखिया को अपना बैंक खाते की पासबुक
की छायाप्रति लगानी होगी। यदि महिला मुखिया का खाता किसी बैंक में नहीं हैं
तो वह अपने पति और पुत्र का बैंक खाता लगा सकती है लेकिन पासबुक की
छायाप्रति पर यह उल्लेख करना होगा कि उक्त खाता पति या पुत्र का है।
000
पात्र गृहस्थितियों के चयन में दिक्कतें
. प्रचार प्रसार और जागरूकता की कमी
. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लगाए गए कर्मचारियों की काम के प्रति उदासीनता।
. एपिक कार्ड की अनिवार्यता।
. नोडल कार्यालय पूति विभाग तक में स्टाफ का टोटा
000
पात्र
गृहस्थियों के चयन के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में टीमों का गठन
किया गया है। हाल में डीएम की ओर से संबंधित अधिकारियों को पत्र भेज कर
निर्देश दिए हैं कि पात्र गृहस्थियों के चयन का काम हर हाल में माह मार्च
के अंत तक पूरा कर लें।
- डॉ. राकेश तिवारी, जिला पूर्ति अधिकारी।