लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के पहले विधानसभा चुनाव में लखीमपुर खीरी जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों से छह विधायक चुने गए थे। इनमें से दो विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं ने अलग-अलग दो बैलेट पेपर पर दो उम्मीदवारों को एक साथ वोट देकर दो विधायक चुने थे। पहली विधानसभा चुनाव के समय जिले में कुल 4,90,646 मतदाता थे जो 18वीं विधानसभा के चुनाव तक बढ़कर करीब पांच गुना हो गए हैं।
वर्ष 1952 में उत्तर प्रदेश विधानसभा का पहला चुनाव हुआ। इससे पहले विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन किया गया। इसमें खीरी जिले में चार विधानसभा क्षेत्र बनाए गए। इनके नाम थे 188 निघासन कम लखीमपुर नार्थ, 189 लखीमपुर साउथ, 190 मोहम्मदी वेस्ट और मोहम्मदी ईस्ट। उस समय विधानसभा क्षेत्र निघासन कम लखीमपुर नार्थ में आज के विधानसभा क्षेत्र, निघासन, पलिया और धौरहरा शामिल थे। इस विधानसभा क्षेत्र से विधायक की दो सीटें थीं। एक सामान्य और एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। मतदाताओं ने दो-दो उम्मीदवारों को वोट देकर दो विधायक चुने। इस क्षेत्र से पहले चुनाव में सामान्य सीट से कांग्रेस के करन सिंह और सुरक्षित सीट से कांग्रेस के ही जगन्नाथ प्रसाद चुनाव जीते।
इसी तरह विधानसभा क्षेत्र लखीमपुर साउथ में लखीमपुर, श्रीनगर और पैला क्षेत्र शामिल थे। यहां भी एक सीट सामान्य और दूसरी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। यहां सामान्य सीट से कांग्रेस के बंशीधर मिश्र और सुरक्षित सीट से कांग्रेस के ही छेदा लाल चौधरी चुनाव जीते। तीसरा विधानसभा क्षेत्र 190 मोहम्मदी वेस्ट जो 1962 से हैदराबाद क्षेत्र कहलाया। यहां से केवल एक सीट थी, कांग्रेस के राम भजन लाल विधायक चुने गए। चौथे विधानसभा क्षेत्र मोहम्मदी ईस्ट में भी एक सीट थी जहां से कांग्रेस के कमाल अहमद रिजवी चुनाव जीते।
वर्ष 1957 में हुए दूसरे विधानसभा चुनाव के पहले हुए परिसीमन में विधानसभा क्षेत्रों की संख्या चार से बढ़कर पांच हो गई। 1957 में धौरहरा, निघासन, श्रीनगर, खीरी और मोहम्मदी में चुनाव हुए और सात विधायक चुने गए। इन विधानसभा क्षेत्रों में श्रीनगर और मोहम्मदी से दो-दो विधायक चुने गए। 1957 के चुनाव में धौरहरा से जगन्नाथ प्रसाद, निघासन से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सुरथ बहादुर शाह, श्रीनगर सामान्य सीट से प्रसोपा के बंशीधर शुक्ल और सुरक्षित सीट से छेदी लाल विधायक चुने गए। इसी तरह मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र में भी दो सीटों पर चुनाव हुआ। यह दोनों सीटें जनसंघ के खाते में गईं। यहां सामान्य सीट से जनसंघ के जगदीश नारायण दत्त सिंह और सुरक्षित सीट से जनसंघ के ही मन्ना लाल चुनाव जीत कर विधायक बने। जबकि खीरी विधानसभा क्षेत्र से प्रसोपा के शिव प्रसाद नागर चुनाव जीते। इस चुनाव में कांग्रेस का एक भी उम्मीदवार नहीं जीत सका।
दो बार दो विधानसभा क्षेत्रों के नाम भी बदले
वर्ष 1962 में हुए विधानसभा के तीसरे चुनाव के पहले एक बार फिर विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन हुआ और इनकी संख्या पांच से बढ़कर सात हो गई। इस परिसीमन के बाद निघासन, धौरहरा, लखीमपुर, श्रीनगर, पैला, हैदराबाद और मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र बने। इन सात विधानसभा क्षेत्रों से सात विधायक चुने गए। वर्ष 1967 के चुनाव में यही स्थिति बरकरार रही केवल आंशिक बदलाव यह हुआ कि कि पैला विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलकर बांकेगंज और श्रीनगर का नाम बदलकर फूलबेहड़ कर दिया गया। 1969 के चुनाव तक यही स्थिति बरकरार रही। 1974 के चुनाव में फिर बांकेगंज को पैला और फूलबेहड़ को श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र का नाम वापस मिला।
परिसीमन बदलने के साथ बदलते गए राजनीतिक समीकरण
वर्ष 1974 के चुनाव से लेकर 2007 तक के विधानसभा चुनाव तक सात विधानसभा क्षेत्र बने रहे। वर्ष 2008 में एक बार फिर विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन हुआ और सात की जगह आठ, पलिया, निघासन, गोला गोकर्णनाथ, श्रीनगर, लखीमपुर, धौरहरा कस्ता और मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र बने हैं। हर परिसीमन के साथ विधानसभा क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरण भी बदलते रहे।