धनगढ़ी (नेपाल)। नेपाल की सीमा से लगे कंचनपुर जिले के शुक्ला फांटा निकुंज पार्क में हुई गणना में बाघों की संख्या में इजाफा पाया गया है। 2018 की हुई गणना के मामले में इस बार की गणना में तीन बाघ अधिक मिले हैं।
कंचनपुर जिले में स्थित शुक्ला फांटा निकुंज पार्क के प्रमुख संरक्षण अधिकृत दिल बहादुर पुन ने बताया कि पार्क में पिछली गणना से अब हुई गणना में बाघ की संख्या में वृद्धि हुई है।
306 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले पार्क में बाघ गणना के लिए 89 कैमरे लगाए गए थे, जिसमें छह नर, 11 मादा व दो व्यस्क बाघ ऐसे हैं जिनके लिंग की पहचान नहीं हो पाई है। कुल मिलाकर पार्क क्षेत्र में 19 बाघ मिले हैं। जबकि बीते वर्ष 2018 में हुई गणना में यहां बाघों की संख्या 16 मिली थी।
राष्ट्रीय वन्यजंतु संरक्षण विभाग के प्रवक्ता विष्णु प्रसाद श्रेष्ठ ने बताया कि नेपाल में सबसे पहले 1995 में हुई बाघ गणना में कुल 98 बाघ पाए गए थे। 2009 में इनकी संख्या 121 पहुंच गई और 2022 में दोगुने लक्ष्य को लेकर 2018 में हुई बाघों की गणना में 235 बाघ पाए गए थे। अब 2022 की गणना के बाद बाघों की सही गिनती का पता चल सकेगा।
रमियाबेहड़ में शावकों संग दिखी बाघिन
धौरहरा। वन रेंज धौरहरा के रमियाबेहड़ क्षेत्र के खेशवाही गांव के पास बृहस्पतिवार रात खेत पर फसल की रखवाली कर रहे ग्रामीण ने दो शावकों संग बाघिन को देखा। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। बृहस्पतिवार को मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने जांच पड़ताल की, लेकिन टीम ने बाघिन होने की पुष्टि नहीं की। वन कर्मियों के मुताबिक पगचिह्न अन्य किसी हिंसक जानवर के हैं। हालांकि ग्रामीणों से सावधानी बरतने को कहा गया है। रेंजर धौरहरा अनिल शाह ने बताया कि सूचना मिलने के बाद टीम को मौके पर भेजा गया था। मगर पगचिह्न बाघिन के न होकर किसी अन्य जंगली जानवर के हैं। संवाद
बाघ और तेंदुए किसानों के सच्चे दोस्त
ममरी। मोहम्मदी रेंज जंगल के आसपास खेती करने वाले किसानों ने माना कि खेतों में विचरण कर रहे बाघ हमारे शत्रु नहीं, बल्कि फसलों के रखवाले मित्र साबित हो रहे हैं। इनसे हमारी फसलों की रखवाली हो रही है। बिहारीपुर फार्म के इंद्रजीत सिंह, अरविंद सिंह, अमरजीत सिंह, जसवीर सिंह, इकबाल सिंह, घमहाघाट के लाल सिंह, बलिहार सिंह, अंग्रेज सिंह, मक्खन सिंह, सुंदरपुर के रामकुमार वर्मा, रमेश गुप्ता, सत्यपाल बर्मा, अयोध्या पुर के अनिल कुमार, सिंगहा के श्याम बिहारी आदि किसानों का कहना है कि अब तक उन्हें खेतों में मचान बनाकर आवारा पशुओं और नीलगायों से फसलों की रखवाली करनी पड़ती थी, लेकिन अब उनकी फसलों की रखवाली खेतों में विचरण कर रहे बाघ-तेंदुए कर रहे हैं। उधर, रेंजर मोबीन आरिफ का कहना है कि बाघ-तेंदुए मानव पर हमला तभी करते हैं जब वह खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं ऐसी दशा में सावधानी बरतते हुए वन्यजीवों को संरक्षण देने, उनकी सुरक्षा करने की जरूरत है। तभी बाघ तेंदुआ हमारे मित्र साबित हो सकते हैं। संवाद