दुधवा जंगल में स्वछंद विचरण करते नर गैंडा नकुल और मादा विजयश्री। स्त्रोत- वन विभाग।
बांकेगंज। दुधवा जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़े गए गैंडों में से मादा गैंडा विजयश्री और नर नकुल के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं। इससे दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन में गैंडों का कुनबा बढ़ने की नई उम्मीद जगी है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना के तीसरे चरण के तहत पांच गैंडों को दक्षिण सोनारीपुर रेंज फेज वन में सौर ऊर्जा चालित बाड़ से निकालकर जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ा गया है।
जंगल में छोड़ने से पहले इन्हें रेडियो कॉलर भी लगाया गया। रेडियो कॉलर के जरिये और हाथियों से गश्त के दौरान यह बात सामने आई कि छोड़े गए गैंडे, गैंडा पुनर्वासन योजना फेज वन के आस-पास ही मंडरा रहे हैं। निगरानी टीमों ने यह भी देखा कि मादा गैंडा विजयश्री और नर गैंडा नकुल के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं।
इन्हें जंगल, तालाब के अंदर साथ-साथ विचरण-जलविहार करते देखा गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन में नई उम्मीद जगी है। टाइगर रिजर्व प्रशासन उम्मीद लगा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में दुधवा को नन्हा मेहमान मिल सकता है। संवाद
-
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि जंगल में स्वछंद विचरण के लिए छोड़े गए गैंडों की रेडियो कॉलर के जरिये निगरानी के साथ-साथ नियमित गश्त से भी उन पर नजर रखी जा रही है। दोनों साथ-सात देखे जा रहे हैं। इनका साथ गैंडा पुनर्वासन योजना के लिए सुखद संदेश ला सकता है।