एपीडीआरपी योजना में बिजली विभाग भले ही मोहल्लों और शहर से सटे कस्बों की बिजली लाइनों को बदलने का दावा कर रहा हो, लेकिन शहर के प्रमुख मार्गों पर अभी भी गुच्छों में उलझे वर्षों पुराने जर्जर तार लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। फंटियों के सहारे जर्जर लाइनों को बांधा गया है, जिससे भूसी और गन्ना भरे ओवरलोड ट्रकों के उलझने से बिजली लाइनें टूट जाती हैं।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक शहर में बिछाई गईं बिजली लाइनें तीन दशक से भी ज्यादा पुरानी हैं। मेला रोड, संकटा देवी, सब्जी मंडी, सरना होटल के पास सहित कई जगहों पर तांबे के तारों को हटाकर उनकी जगह एल्युमिनियम के तार डाल दिए गए थे। जिनकी क्षमता के निर्धारित वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन उन्हें जोड़कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों मेला रोड, बड़ा चौराहा, नौरंगाबाद रोड, जेल रोड, गुरुनानक चौराहा, संकटा देवी, सीतापुर रोड, गढ़ी रोड समेत कई जगहों पर इन जर्जर तारों के कारण हादसे हो चुके हैं। गर्मी के दिनों में तो इन लाइनों के नीचे खड़े होने का मतलब जान जोखिम में डालने के बराबर होता है।
ऐसा नहीं जर्जर तारों और उनसे होने वाले खतरों को लेकर बिजली विभाग के अधिकारी अनभिज्ञ हैं, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के कारण तारों को नहीं बदला जा रहा है जबकि एपीडीआरपी योजना के तहत शहरी क्षेत्र में खासकर उन जगहों पर बिजली लाइनों को बदला जाना था, जहां जर्जर तारों के टूटने की ज्यादातर घटनाएं हो रही हैं, लेकिन एपीडीआरपी योजना में अब तक हुए कार्यों में शहर के प्रमुख मार्गों के जर्जर तार नहीं बदले गए हैं। इस संबंध में गढ़ी उपकेंद्र के अवर अभियंता मनोज पुष्कर का कहना है कि योजना की कार्यदाई संस्था को शहर के उन सभी जगहों के बारे में बताया गया है जहां जर्जर तारों को बदला जाना है। अभी मोहल्लों में ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि का कार्य चल रहा है, जिसके बाद जर्जर तारों को भी बदला जाएगा।