जिला अस्पताल के डॉक्टरों से चलाया जा रहा काम
पांच डॉक्टर और 20 स्टाफ नर्स होनी चाहिए तैनात
जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई), एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) पीड़ित बच्चों के लिए करीब तीन साल पहले बने आईसीयू वार्ड में अभी तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों से ही यहां भर्ती बच्चों का इलाज कराया जाता है।
बच्चों को जेई और एईएस के प्रकोप से बचाने के लिए करोड़ों की लागत से आईसीयू वार्ड तैयार किया गया। वार्ड में आज तक एक भी डॉक्टर और वार्ड ब्वाय की तैनाती नहीं हो सकी है। वहीं स्टाफ नर्स के भी कई पद खाली है। आईसीयू वार्ड के लिए शासन की ओर से बनाए गए मानकों के अनुसार वार्ड के लिए पांच डॉक्टर, 20 स्टाफ नर्स सहित चार वार्ड ब्वाय तैनात होने चाहिए, लेकिन वहां पर सिर्फ 15 स्टाफ नर्स और चार टेक्नीशियन ही तैनात हैं।
एबीजे मशीन के बगैर चल रहा आईसीयू वार्ड
आईसीयू वार्ड में आज तक एबीजे मशीन (ब्लड गैस एनोलाइजर) नहीं लग सकी है। मशीन का उपयोग बच्चों के खून में ऑक्सीजन की उपलब्धता मापने में होता है।
टेक्नीशियन कर रहे वार्ड ब्वाय का काम
दस बेड के आईसीयू वार्ड में वार्ड ब्वाय की तैनाती तक नहीं है। इससे वहां भर्ती बच्चों की हालत बिगड़ने की स्थित में डॉक्टर बुलाने के लिए या तो स्टाफ नर्स को दौड़ना पड़ता है या फिर वहां लगी मशीनों को चलाने के लिए तैनात टेक्नीशियनों को। वार्ड में अभी तक एईएस पीड़ित 36 बच्चे भर्ती हुए हैं। इसमें से सात बच्चों की एईएस से और एक बच्चे की जेई से मौत हो चुकी है। वहीं 25 बच्चे ठीक होकर घर जा चुक हैं। जबकि सोमवार को तीन बच्चों का इलाज चल रहा था।
आईसीयू वार्ड के लिए अभी तक डॉक्टर नहीं मिले हैं। जबकि कई बार शासन को लिखा पढ़ी की गई है। हाल ही में भी फिर से शासन को रिपोर्ट भेजी गई है उम्मीद है कि जल्द ही डॉक्टरों की तैनाती होगी।
संतोष मिश्रा, प्रभारी सीएमएस