लखीमपुर खीरी। अतिरिक्त दहेज के लिए विवाहिता को प्रताड़ित कर खुदकुशी के लिए विवश करने के 20 साल पुराने मामले में अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया। एडीजे मनोज सिंह ने दोषी पति नागेश्वर को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माने की पूरी राशि मृतका की माता अनारकली को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2003 में शांति देवी की शादी ईसानगर थाना क्षेत्र के मूड़ी गांव निवासी नागेश्वर से हुई थी। आरोप था कि ससुराल वाले दहेज से संतुष्ट नहीं थे और अतिरिक्त दहेज में 10 हजार रुपये व साइकिल की मांग करते थे। मांग पूरी न होने पर विवाहिता को घर से निकाल दिया गया। बाद में सुलह पंचायत के बाद उसे घर में रख लिया गया, लेकिन प्रताड़ना जारी रही।
23 जून 2007 की रात शांति देवी की संदिग्ध हालत में तबीयत बिगड़ी और सुबह उसका शव मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विष के लक्षण मिले थे। पुलिस ने सूचना के बावजूद शुरुआत में रिपोर्ट दर्ज नहीं की। उच्चाधिकारियों के आदेश और अदालत के हस्तक्षेप के बाद पति समेत कई लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज हुई। जांच के बाद पुलिस ने केवल पति नागेश्वर को खुदकुशी के लिए उकसाने की धाराओं में जेल भेजकर आरोपपत्र दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान मृतका की माता अनारकली सहित छैल बिहारी, दूलनदास, कंधईलाल, रजनीश, डॉ. केसी वर्मा, एसआई शिव प्रसाद और सीओ बसंत लाल ने बयान दर्ज कराए। सोमवार को अदालत ने नागेश्वर को दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही जुर्माने की पूरी राशि मृतका की माता को मुआवजे के तौर पर देने की व्यवस्था की।